ओलंपिक आंदोलन से भारत का रिश्ता 1920 के एंटवर्प ओलंपिक से जुड़ा जहां पहली बार चार भारतीय खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। वर्ष 1900 के पेरिस ओलंपिक में एक एंग्लो-इंडियन नॉर्मन प्रिचार्ड ने एथलेटिक्स में दो रजत पदक हासिल किए थे और कई वर्षों तक तालिका में ये पदक भारत के नाम दर्ज रहे।
स्वतंत्रता दिवस स्पेशल: इन खिलाड़ियों ने ओलंपिक में लहराया तिरंगा, इनके जज्बे को देश का सलाम
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केडी जाधव
स्वतंत्र भारत में व्यक्तिगत तौर पर ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे केडी जाधव। 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में जाधव ने फ्री स्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक हासिल किया था। उस साल भारत को दो पदक मिले थे। पहला हॉकी में स्वर्ण और दूसरा कुश्ती में कांस्य। महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव गोलेश्वर में रहते थे केडी जाधव। वे बचपन से ही खेलों में काफी रुचि रखते थे।
भारत को आजादी मिलने के बाद पहला ओलंपिक लंदन में 1948 में हुआ था। जिसमें जाधव को निराशा ही हाथ लगी। 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में उन्होंने फ्री स्टाइल कुश्ती में तीसरा स्थान हासिल किया। 14 अगस्त 1984 को एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई।
एक समय था जब ओलंपिक में भारतीय हॉकी की तूती बोलती थी सन् 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से शुरू हुआ भारतीय हॉकी का सुनहरा सफर 1956 के मेलबोर्न ओलंपिक तक बेरोकटोक चला। 112 वर्षों के ओलंपिक इतिहास में भारत के खाते में सिर्फ 15 पदक आए हैं और इनमें से 11 पदक भारत ने हॉकी में जीते हैं।
भारत ने हॉकी में आठ स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक जीते हैं। वर्ष 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में भारत ने पहली बार स्वर्ण पदक हासिल किया। 1928 से लेकर 1956 तक भारतीय हॉकी ने लगातार छह स्वर्ण पदक जीते। उस दौरान ओलंपिक में भारत ने 24 मैच खेले और 24 में जीत भी हासिल की। भारत ने 1964 के टोक्यो और 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था।
लिएंडर पेस
लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी बाद में बेहद मशहूर हुई लिएंडर पेस ने वर्ष 1996 के अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी थी। अटलांटा ओलंपिक में उन्हें वाइल्ड कार्ड से प्रवेश मिला था।
अटलांटा में पेस ने अपने सिंगल्स अभियान की शुरुआत ही शानदार अंदाज़ में की और पहले दौर में अमरीका के जाने माने खिलाड़ी रिची रेनबर्ग को पटखनी दे दी। क्वार्टर फाइनल जीत कर तो उन्होंने कमाल ही कर दिया।
सेमीफाइनल में अगासी ने पेस को कोई मौक़ा नहीं दिया और 7-6, 6-3 से मैच जीत कर पेस के साथ साथ उनके करोड़ों समर्थकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लेकिन पेस ने ब्राजील के फर्नैंडो मेलीजेनी को हराकर कांस्य पदक जीत लिया।
कर्णम मल्लेश्वरी
वर्ष 2000 के सिडनी ओलंपिक में भारत की कर्णम मल्लेश्वरी ने भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में भारत का नाम जुड़वाया। कर्णम मल्लेश्वरी भारत की पहली और अभी तक एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं, जिन्हें ओलंपिक में कोई पदक मिला है। मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक के 69 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में पैदा हुईं कर्णम मल्लेश्वरी ने 12 साल की उम्र से ही भारोत्तोलन का अभ्यास शुरू कर दिया था। भारतीय खेल प्राधिकरण की एक योजना के तहत मल्लेश्वरी को प्रशिक्षण मिला। मल्लेश्वरी को अर्जुन पुरस्कार, खेल रत्न पुरस्कार और पद्म श्री सम्मान भी मिल चुका है।