एशियाई खेलों में भारत को एथलेटिक्स के अलावा सर्वाधिक मेडल रेसलिंग (56) ने दिलाए हैं। भारतीय रेसलिंग दल जकार्ता पालेमबांग गेम्स में पूरे विश्वास के साथ जाएगा क्योंकि उसके 12 पहलवानों ने इस साल अप्रैल में हुए 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीते।
गोल्डकास्ट में संपन्न कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 5 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रोंज सहित कुल 12 पदकों के साथ रेसलिंग की अंक तालिका में शीर्ष पर था। हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स की तुलना में एशियाई खेलों में ज्यादा कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलेगी और गोल्ड कोस्ट जैसा प्रदर्शन दोहराना भारतीय पहलवानों के लिए आसान नहीं होगा। चलिए गौर करते हैं कि इस बार किन पहलवानों से मेडल जीतने की उम्मीद है:
बजरंग पूनिया- चार साल पहले इंचियोन गेम्स में योगेश्वर दत्त एकमात्र पहलवान थे, जिन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। मगर वो संन्यास ले चुके हैं। उनके साथी बजरंग पूनिया हालांकि शानदार फॉर्म में हैं। बजरंग ने कॉमनवेल्थ गेम्स और इस्तांबुल में पिछले महीने यासर डोगु इंटरनेशनल पर आयोजित टीबिलिसी ग्रैंडप्रिक्स में गोल्ड मेडल जीते। 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत को बजरंग से गोल्ड की उम्मीद है। अगर पूनिया ने जकार्ता में अपना शानदार फॉर्म जारी रखा तो निश्चित ही देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
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sushil kumar
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सुशील कुमार- दो बार के ओलंपिक मेडल विजेता सुशील कुमार 74 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन भी हैं। सुशील का एशियाई खेल में प्रदर्शन उम्दा नहीं रहा है, जिसमें वह इस बार जरूर सुधार करना चाहेंगे। सुशील ने 2006 एशियाई खेल में ब्रोंज (कांस्य) मेडल जीता था।
सुमित मलिक- गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में 125 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने वाले सुमित एशियाई खेलों में भी उपलब्धि हासिल करने की कोशिश करेंगे। संदीप तोमर (57 किग्रा), पवन कुमार (86 किग्रा) और मौसम खत्री (97 किग्रा) अन्य भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान हैं जो जकार्ता में मेडल जीत सकते हैं।
विनेश फोगाट- कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला पहलवानों में गोल्ड मेडल जीतने वाली एकमात्र रेसलर हैं विनेश फोगाट। उन्होंने 50 किग्रा वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की थी। विनेश ने इंचियोन गेम्स में ब्रोंज मेडल जीता था, जिसे इस बार वह गोल्ड में तब्दील करने की पूरी कोशिश करेंगी।