पेड़-पौधे जीवंत शक्ति से भरपूर प्रकृति के ऐसे अनुपम उपहार हैं जो सभी को प्राणवायु ऑक्सीजन तो देते ही हैं,पर्यावरण को भी शुद्ध और संतुलित रखते हैं। इतना ही नहीं वास्तुदोष निवारण में,बीमारियों को ठीक करने में एवं उत्तम स्वास्थ्य संरक्षण में वृक्ष-वनस्पतियों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता हैं। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने के लिए वृक्षारोपण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है, इन्हें लगाना हमारे लिए हर हाल में लाभकारी हैं। पेड़ों द्वारा बनाने वाली ऑक्सीजन के कारण ही हम ज़िंदा रहते हैं। भारत में इस समय कोरोना महामारी का कहर जारी है। ऑक्सीजन की कमी कई मरीजों की मौत की वजह बन रही है। ऐसे हालातों में सभी को ये बात समझनी चाहिए कि पर्यावरण का संरक्षण ही हमारे जीवन का सुरक्षा कवच है। पर्यावरण दिवस के मौके पर हमें पर्यावरण की सुरक्षा और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लेना चाहिए। आइए जानते हैं उन पेड़ों के बारे में जो ज्यादा ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
World Environment Day: पर्यावरण दिवस आज, भरपूर ऑक्सीजन देकर पर्यावरण को शुद्ध रखते हैं ये पेड़
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पीपल
पीपल के पेड़ के साथ कई धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती है। मान्यता है कि इसकी जड़ में श्री विष्णु, तने में भगवान शंकर तथा अग्रभाग में साक्षात ब्रह्माजी निवास करते हैं। पीपल के पेड़ का विस्तार, फैलाव और ऊंचाई बहुत अधिक होती है। यह पेड़ अन्य पेड़ों के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन देता है यानि करीब 22 घंटे से भी ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देता है। दिन-रात ऑक्सीजन देने अर्थात जीवन दायिनी वायु देने के कारण इस वृक्ष को भगवान विष्णु का प्रतीक माना गया है। बौद्ध धर्म में इसे बोधी वृक्ष के नाम से जानते हैं, मान्यता है कि इसी पेड़ के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने के कारण पर्यावरणविद पीपल का पेड़ लगाने की सलाह देते हैं।
बरगद
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष होने साथ ही इस वृक्ष को हिन्दू धर्म में बहुत पवित्र भी माना जाता है। धार्मिक आस्थाओं के साथ-साथ यह वृक्ष पर्यावरण के संरक्षण और उसको साफ सुथरा बनाए रखने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बरगद के पेड़ और इसकी पत्तियों में कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने की सबसे ज्यादा क्षमता होती है। पीपल के सामान ही यह वृक्ष भी बहुत अधिक मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं। इसलिए बरगद का वृक्ष भी पर्यावरण के लिए किसी वरदान से कम नहीं।
नीम
नीम के पेड़ में संक्रमण का खात्मा करने के गुण मौजूद हैं। एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर नीम का वृक्ष दूषित वायुमंडल को शुद्ध कर स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करता है। इसकी पत्तियों की बनाबट ऐसी होती है कि नीम का एक स्वस्थ बड़ा पेड़ बहुत अधिक मात्रा में ऑक्सीजन उत्पादित कर सकता है। इसलिए हमेशा ज्यादा से ज्यादा नीम के पेड़ लगाने की सलाह दी जाती है, इससे आसपास की हवा हमेशा शुद्ध रहती है बीमारियों को दूर रखने वाले नीम के पेड़ को एवरग्रीन ट्री भी कहा जाता है और पर्यावरणविदों की मानें तो यह पेड़ एक नैचुरल एयर प्यूरीफायर है जो प्रदूषित गैसों जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन को हवा से सोख कर पर्यावरण में ऑक्सीजन को छोड़ता है।
अशोक
शुभ एवं मंगलकारी वृक्ष के रूप में अशोक के वृक्ष का वर्णनं ब्रह्मवैवर्त पुराण सहित अनेकों धर्मशास्त्रों में किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वृक्ष को शोक हरने वाला माना गया है। पर्यावरण की दृष्टि से देखें तो अशोक का हरा-भरा पेड़ न सिर्फ ऑक्सीजन उत्पादित करता है बल्कि इसके फूल पर्यावरण को सुंगधित रखते हैं और उसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं।अशोक का पेड़ लगाने से न केवल वातावरण शुद्ध रहता है बल्कि उसकी सुंदरता से सकारात्मक माहौल रहता है। घर में अशोक का पेड़ वातावरण को शुद्ध रखता है और इस पेड़ की मुख्य विशेषता यह है कि यह पेड़ जहरीली गैसों के अलावा हवा के दूसरे दूषित कणों को भी सोख लेता है।