सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। यह समस्त सृष्टि की आत्मा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य अनवरत रूप से चलता रहता है। यह कभी नहीं थमता। ये हमें लक्ष्य की ओर सतत बढ़ना सिखाता है। सनातन संस्कृति में सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य एवं शक्ति के देवता के रूप में पूजा जाता हैं। सूर्य के ही कारण पृथ्वी पर जीवन संभव है, दिन-रात संभव, ऋतुएं संभव है। वैदिक ऋषि-मुनियों ने उदय होते हुए सूर्य को ज्ञान रूपी ईश्वर बताया है।
सीख: सूर्य से सीखें अपने लक्ष्य की ओर सतत बढ़ना और समानता का भाव
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सूर्योपनिषद में सूर्य की महिमा
सूर्योपनिषद में सूर्य को ही संपूर्ण जगत की उत्पत्ति का एक मात्र कारण निरूपित किया गया है और उन्ही को संपूर्ण जगत की आत्मा तथा ब्रह्म बताया गया है। सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन सूर्य ही करते है। सूर्य ही संपूर्ण जगत की अंतरात्मा हैं। आइए, आज जानते है सूर्य की वो विशेषताएं, जिनसे हमें जीवन जीने के नए तरीके मिलेंगे।
लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना
सूर्य से हमें लक्ष्य की ओर बिना रुके चलने की प्रेणना मिलती है। सूर्य बिना रुके हमेशा चलते रहता है, चाहे वातावरण कैसा भी हो।
परिस्थितियों से लड़ना
सूर्य से हमें परिस्थितियों से लड़ना सीखना चाहिए। जब भी सूर्य पर ग्रहण लगता है, वह इन परिस्थितियों से घबराता नहीं है, डट कर उन परिस्थितियों का सामना करता है।
समानता का भाव
सूर्य किसी से भी भेदभाव नहीं करता है, वह अपनी रोशनी सबको प्रदान करता है।