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Kabir Das jayanti 2021: कबीर जयंती के अवसर पर पढ़िए उनके अनमोल दोहे, जो जीवन को दिखाते हैं सही राह

Thu, 24 Jun 2021 11:07 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 24 Jun 2021 11:07 AM IST
सार

कबीर दास जी की जयंती के पावन अवसर पर पढ़िए उनके अनमोल दोहे। जो मनुष्य को जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं।

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Kabir Das jayanti 2021 date read sant kavi kabir das anmol dohe
कबीर दास जयंती 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास में पूर्णिमा तिथि को संत कबीर की जयंती मनाई जाती है। इस बार उनकी जयंती 24 जून यानी आज मनाई जा रही है। कबीर दास का जन्म 1398 में माना जाता है। इनके जन्म के समय हर तरफ सर्वत्र धार्मिक कर्मकांड, अंधविश्वास और पाखंड का बोलबाला था। इन्होंने समाज में व्याप्त भ्रांतियों और बुराइयों को दूर करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और लोगों में भक्ति भाव का बीज बोया। इनकी मृत्यु 1518 में मगहर में हुई थी। कबीर दास जी के दोहे अत्यंत सरल भाषा में थे, जिसके कारण इनके दोहों ने लोगों पर व्यापक प्रभाव डाला। आज भी कबीर दास जी के दोहे जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं। तो आइए पढ़ते हैं उनके कुछ ऐसे ही अनमोल दोहे।

 

 

Kabir Das jayanti 2021 date read sant kavi kabir das anmol dohe
कबीर दास जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pinterest
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय ।

जो मन देखा आपना, मुझ से बुरा न कोय ।

 

इस दोहे में कबीर दास जी कहते हैं कि मैं सारा जीवन दूसरों की बुराइयां देखने में लगा रहा लेकिन जब मैंने खुद अपने मन में झांका तो पाया कि मुझसे बुरा कोई मनुष्य नहीं है। यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य दूसरे में बुराईयां खोजता है जबकि यदि स्वयं के भीतर देखा जाए तो बहुत सी बुराईयां हैं। 

 

Kabir Das jayanti 2021 date read sant kavi kabir das anmol dohe
कबीर दास जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर ।

पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर ।

 

इस दोहे में कबीर दास जी कहते हैं कि खजूर का पेड़ भले ही बहुत बड़ा होता है लेकिन न तो वो किसी को छाया देता है और फल भी बहुत दूर ऊंचाई पर लगते हैं। जिस कारण वह राह चलते मनुष्य के लिए फल और छाया दोनों ही देने में असमर्थ होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जो किसी का भला नहीं कर सकता उसके बड़े होने का भी कोई फायदा नहीं होता है।

 

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Kabir Das jayanti 2021 date read sant kavi kabir das anmol dohe
कबीर जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये ।

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ।

 

इस दोहे में कबीर दास जी कहते हैं कि मनुष्य को ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो सुनने वाले के मन को भाए कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य को मधुर वाणी बोलनी चाहिए। मधुर वाणी दूसरों को तो सुख पहुंचाती ही है, स्वयं के मन को भी बड़े आनंद का अनुभव होता है।

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Kabir Das jayanti 2021 date read sant kavi kabir das anmol dohe
कबीर दास जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pinterest
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।

पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब ।

 

इस दोहे में कबीर दास जी कहते हैं कि जो कार्य कर करना है उसे आज ही कर लेना चाहिए और जो आज करना है उसे अभी कर लेना चाहिए। पलभर में प्रलय जो जाएगी तब अपने कार्य को कब करोगे। यहां पर कबीर दास जी ने मनुष्य को समय का मूल्य समझाया है।

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