आचार्य चाणक्य चंद्रगुप्त के महामंत्री थे। इन्होंने ही अपनी बुद्धि और नीतियों को बल पर नंदवंश का नाश करके चंद्रगुप्त को एक साधारण बालक से मौर्य साम्राज्य का शासक बनाया। ये चंद्रगुप्त के महामंत्री होते हुए भी राजसी ठाट-बाट से दूर एक कुटिया में साधारण जीवन व्यतीत करते थे। इनको कौटिल्य और विष्णु गुप्त भी कहा जाता था। चाणक्य नाम इनको अपने गुरु चणक से प्राप्त हुआ था। आज के समय में भी यदि श्रेष्ठ विद्वानों की बात की जाए तो चाणक्य का नाम अवश्य लिया जाता है। ये एक कुशल कूटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और महाविद्वानी थे। इनका संबंध विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय तक्षशिला से था। इन्होंने तक्षशिला से शिक्षा प्राप्त की और वहीं पर आचार्य के पद पर रहते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। इस तरह से ये एक श्रेष्ठ विद्वान होने के साथ एक योग्य शिक्षक भी थे। इन्हें कई विषयों की गहरी समझ थी। इनके द्वारा द्वारा कई महत्वपूर्ण शास्त्र लिखे गए। जिनमें से नीतिशास्त्र की बातें आज के समय में भी लोगों को जीवन की सही राह दिखाती हैं। हालांकि आज के समय में कुछ लोगों को चाणक्य की नीतियां कटु लगती हैं परंतु ये मनुष्य को जीवन की सत्यता से अवगत कराती हैं। नीतिशास्त्र में कुछ ऐसी परिस्थितियों के बारे में बताया गया है जब वर्षा का जल, अन्न और दीपक की रोशनी भी व्यर्थ होती है। जानते हैं कि कौन सी हैं वे परिस्थितियां।
चाणक्य नीति: इन परिस्थितियों में अन्न, वर्षा का जल और दीपक का प्रकाश भी हो जाता है व्यर्थ
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Fri, 04 Jun 2021 10:05 AM IST
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