आचार्य चाणक्य का नाम आज के समय में भी श्रेष्ठ विद्वानों में गिना जाता है। इन्होंने अपने जीवन में विपरीत से विपरीत परिस्थितियों का सामना किया फिर भी कभी हार नहीं मानी और धैर्य को बनाए रखा। इन्होंने अपनी बुद्धि और नीतियों का प्रयोग करके अपने शत्रु घनानंद का नाश करके चंद्रगुप्त को साधारण बालक से मौर्य साम्राज्य का सम्राट बनाया। ये चंद्रगुप्त के महामंत्री बने किंतु फिर भी ये राजसी ठाट-बाट से दूर एक कुटिया में साधारण जीवन व्यतीत करते थे। ये कई विषयों में परांगत थे। इसी कारण ये विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से भी विख्यात थे। इनके लिखे गए ग्रंथ 'नीति शास्त्र' की बातें जीवन के पहलुओं को बहुत करीब से स्पर्श करती हैं और जीवन से जुड़ी समस्याओं का हल करने में सहायक हैं। नीतिशास्त्र में धन, तरक्की, विवाह, व्यापार, नौकरी, मित्रता और शत्रुता समेत कई बातों का जिक्र किया गया है। चाणक्य नीति में कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं, जिनका त्याग कर देना ही हितकर होता है अन्यथा व्यक्ति को मान-सम्मान की हानि उठानी पड़ती है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वे कार्य।
चाणक्य नीति: अगर करते हैं ये कार्य तो उठानी पड़ेगी मान-सम्मान की हानि
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निंदारस में लीन रहने वाले लोग
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को सदैव निंदा करने से बचना चाहिए। निंदा करने वाले व्यक्ति को दूसरों के पीछे उनको भला-बुरा कहते हैं, जिसके कारण वे दूसरों की नजरों में अपने मान-सम्मान को कम करते हैं। ऐसे लोगों से सदैव दूरी बनाकर रखनी चाहिए जो सदैव निंदारस में लीन रहते हो। इसके साथ ही स्वयं भी निंदारस से बचकर रहना चाहिए। जो लोग पीठ पीछे दूसरों की बुराई करते हैं, वे सदैव उपहास और घृणा का पात्र बनते हैं।
झूठ बोलने वाले
हर धर्म, नीति और विद्वान व्यक्ति यही कहता है कि मनुष्य को सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और सत्य के लिए आवाज उठानी चाहिए। सत्य से भले ही कुछ समय आपको परेशानियों का सामना करना पड़े परंतु अंत में सत्य की ही विजय होती है। झूठ ज्यादा दिनों तक टिका नहीं रह सकता। जो लोग झूठ बोलकर अपना काम निकालते हैं। दूसरों को धोखा देते हैं या सफल होने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं ऐसे लोग दूसरों की नजरों में अपने सम्मान को कम करते हैं साथ ही झूठ बोलकर पाई गई सफलता भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकती है। जब व्यक्ति के द्वारा बोले गए झूठ की सच्चाई सामने आती है तो उसे सभी के सामने लज्जित होना पड़ता हैै, इसलिए इस गलत आदत का तुरंत त्याग कर देना चाहिए।
बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बोलने वाले
कुछ लोगों की आदत होती है कि वे हर बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहते हैं। दूसरों के सामने स्वयं को बहुत प्रतिभावान और धनवान दिखाने की कोशिश करते हैं यानी दोहरी जिंदगी जीते हैं उन्हें एक न एक दिन मान हानि का सामना अवश्य करना पड़ता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को कभी भी अपने वस्त्रों और साधारण जीवन को लेकर संकोच नहीं करना चाहिए।