Chanakya Niti in Hindi: चाणक्य नीति में कई ऐसे सूत्र हैं जिन्हें अपनाकर व्यक्ति सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है। इसमें बताए गए सूत्र मनुष्य जीवन के लिए मार्गदर्शिका का कार्य करते हैं। चाणक्य नीति मनुष्य जीवन के हर एक महत्वपूर्ण पहलू को स्पर्श करती है। इसी में से एक पहलू है स्वास्थ्य।
चाणक्य नीति: अच्छी सेहत के लिए आचार्य चाणक्य की ये पांच बेहतरीन बातें
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भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम्।।
अर्थात भोजन न पचने पर पिया गया पानी औषिधि के समान होता है। भोजन पचने के करीब आधे से एक घंटे बाद पानी पीना शरीर के लिए फायदेमंद माना गया है। भोजन के बीच में बहुत थोड़ा पानी पीना अमृत के समान माना गया है। वहीं भोजन के तुरंत बाद पानी का सेवन विष के समान होता है जो शरीर को हानि पहुंचाता है। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए हमारी सेहत का अच्छा होना बहुत ही जरूरी है।
इसमें आचार्य चाणक्य ने यह बताया है कि हमें अच्छे स्वास्थ्य के लिए पानी किस समय पीना चाहिए। क्योंकि हम अक्सर पानी पीने के सही तरीके से अंजान होते हैं। इसी प्रकार वे खान-पान को लेकर कहते हैं कि हम जैसा भोजन ग्रहण करेंगे। वैसा ही हमारा मन परिवर्तित होगा। उसी के अनुरूप ही हम आचरण करेंगे।
इस संबंध में एक कहावत भी है कि जैसा खाएंगे अन्न, वैसा होगा मन। आचार्य चाणक्य के अनुसार, यदि हम सात्विक भोजन करते हैं तो हमारा मन सात्विक होता है। हमारे विचार भी निर्मल होते हैं। ऐसे ही राजसिक भोजन करने पर राजसी विचार आते हैं और तामसिक भोजन करने पर हमारे विचारों में भी उस तरह का भाव देखने को मिलता है।
आचार्य चाणक्य के अनुसार, अच्छी सेहत और निरोगी काया के लिए सप्ताह में एकबार पूरे शरीर की मालिश करनी चाहिए। इससे रोम छिद्र खुल जाते हैं और अंदर की गंदगी बाहर निकल जाती है। मालिश के बाद स्नान अवश्य ही करना चाहिए।