{"_id":"5e74d3808ebc3e6fc8491cf4","slug":"chanakya-niti-help-in-happy-lifestyle","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Chanakya Niti: चाणक्य की इन 4 बातों को अपनाते ही जीवन हो जाएगा सुखमय","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
Chanakya Niti: चाणक्य की इन 4 बातों को अपनाते ही जीवन हो जाएगा सुखमय
Fri, 20 Mar 2020 08:15 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Fri, 20 Mar 2020 08:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर समस्या का समाधान आचार्य चाणक्य की नीतियों में मिलता है और जीवन की हर परेशानी से निकलने में चाणक्य नीति सर्वश्रेष्ठ साबित होती है। आर्चाय चाणक्य की नीतियों की बदौलत ही चंद्र गुप्त मौर्य राजा बन पाया। आचार्य चाणक्य की कुछ ऐसी ही बातों का पालन कर उनके बताएं मार्ग पर चलकर जीवन में शान्ति की स्थापना कर सकते हैं। आइए, आज जानते हैं कि क्या है चाणक्य के कुछ अनमोल वचन...
अन्न का अपमान न हो
- चाणक्य के अनुसार आपकी थाली से अन्न का एक भी दाना बर्बाद नही होना चाहिए यदि ऐसा होता है तो आपके घर कभी भी सुख समृद्धि का वास नही होता है। हमें उतना ही भोजन अपनी थाली में लेना चाहिए, जितनी हमें भूख हो। अन्न का जीवन में कभी भी अपमान नहीं करना चाहिए।
धन की बर्बादी
- जिस घर में धन गलत कार्यों में प्रयोग किया जाता है, उस घर में हमेशा कलह की संभावना बनी रहती है। जिस कारण वहां कभी खुशनुमा माहौल नही रहता है और माता लक्ष्मी भी रूष्ठ हो जाती है। हमें धन हमेशा सोच-समझकर खर्च करना चाहिए और धन का फालतू खर्च नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
दांपत्य जीवन में छल कपट न हो
- पति-पत्नी के मधुर रिश्ते में यदि कपट का स्थान है और वो एक दूसरे से बातें छुपाते है तो वो रिश्ता नही चल पाता है और ऐसे में घर में कभी भी सुख समृद्धि नही आती है। पति-पत्नी का रिश्ता पवित्र होता है, इसलिए इस पावन रिश्ते में छल कपट का कोई स्थान नहीं होता है।
विज्ञापन
ज्ञानियों की बातों पर अमल करना जरूरी
- चाणक्य कहते है कि यदि कोई ज्ञानी व्यक्ति गरीब भी है और कोई मूर्ख अमीर है फिर भी हमें ज्ञानी व्यक्ति की ही बात का अनुसरण करना चाहिए और बात माननी चाहिए। ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है, इसलिए जितना भी ज्ञान मिले हमें ग्रहण कर लेना चाहिए।