Bhagavad Gita Shlok About Life: हजारों वर्षों पुरानी भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्मिक और मानसिक संघर्षों के समाधान का गहरा विज्ञान है। हिंदू धर्म में गीता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके जरिए व्यक्ति जीवन जीने की कला और समस्याओं का निवारण करना सीखता है। इस भागदौड़ भरे दौर में हम सभी किसी न किसी रूप में तनाव, बेचैनी और गुस्से का सामना करते हैं।
Bhagavad Gita Shlok: आपका जीवन बदल देंगे गीता के ये पांच श्लोक, अपनाने पर मिलते हैं कई लाभ
Gita Shlok: भगवद गीता हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे कर्म, भक्ति और ज्ञान पर गहन चर्चा की गई है। हजारों वर्षों पुरानी भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्मिक और मानसिक संघर्षों के समाधान का गहरा विज्ञान भी है। चलिए आपको बताते हैं गीता के उन पांच श्लोकों के बारे में जो आपका जीवन बदल देंगे।
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विहाय कामाण्यः सर्वान्पुमंशचरति निष्स्पृहः।
निर्ममो निरहंकार स शांतिमधिगच्छति ॥
भगवद गीता में इस श्लोक का अर्थ है कि, जो व्यक्ति सभी भौतिक इच्छाओं का त्याग कर स्वामित्व की भावना से रहित और अहंकार से मुक्त होता है, वही सच्ची शांति प्राप्त करता है।
कर्मण्य-एवाधिकार ते मा फलेषु कदाचन |
मा कर्म-फल-हेतुर भूर मा ते सङ्गोऽस्तवकर्मणि ||
भगवद गीता में इस श्लोक का अर्थ है कि, आपका अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में नहीं। इसलिए कर्म के फल की चिंता न करें, बल्कि निष्काम भाव से अपने कर्म करते रहें।
युक्त: कर्मफलं त्यक्त्वा शांतिमापनोति नैष्ठिकम्।
अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते॥
भगवद गीता में इस श्लोक का अर्थ है कि, जो व्यक्ति फल की चिंता किए बिना अपना कर्म करता है, उसे शांति मिलती है, जबकि जो फल के लालच में काम करता है, वह मोह-माया में फंस के रह जाता है।
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भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम्।
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शांतिमृच्छति ॥
भगवद गीता में इस श्लोक का अर्थ है कि, जो व्यक्ति सभी यज्ञों और तपस्याओं का भोक्ता, सभी लोकों का स्वामी और सभी प्राणियों का मित्र या शुभचिंतक जानकर भगवान को पहचान लेता है, वह जीवन में सच्ची शांति प्राप्त करता है।