{"_id":"585152924f1c1ba06f64b2ac","slug":"this-place-was-lord-rama-appeared-mahadev","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इस जगह श्रीराम को शिव ने दिए थे दर्शन","category":{"title":"Spirituality","title_hn":"आस्था","slug":"spirituality"}}
इस जगह श्रीराम को शिव ने दिए थे दर्शन
Thu, 15 Dec 2016 12:49 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 15 Dec 2016 12:49 AM IST
विज्ञापन
1 of 3
रात्रि प्रवास के दौरान राम को स्वप्न में शिवलिंग का दर्शन हुआ था
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
उन्नाव जिला मुख्यालय से 40 किमी. दूर रायबरेली रोड पर तकिया पाटन स्थित सहस्त्रलिंगेश्वर महादेव का मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को खुद महादेव ने दर्शन दिये थे। ऐसी मान्यता है कि रात्रि प्रवास के दौरान राम को स्वप्न में शिवलिंग का दर्शन हुआ था। प्रात:काल होने पर राम ने घने जंगल के बीच स्थित झुरमुटों के बीच इस शिवलिंग का दर्शन किया था। तभी से इस स्थान पर संत और महात्मा आते हैं।
हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है ये मंदिर
2 of 3
बाबा सहस्त्रलिंगेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
सहस्त्रलिंगेश्वर महादेव का मंदिर व मोहब्बत शाह बाबा की मजार आज भी गंगा-जमुनी संस्कृति को बनाए हुए है। यहां आमने-सामने बने मोहब्बतशाह बाबा की मजार व सहस्त्रलिंगेश्वर महादेव मंदिर पर सभी लोग सजदे में सिर झुकाते हैं। गुरुवार को मंदिर व मजार परिसर में विशाल पाटन मेले में लोगों की भारी भीड़ जुटेगी। पांच शताब्दी से भारतीय संस्कृति को समेटे सर्वधर्म संभाव के प्रतीक रहे तकिया मेला पौष के पहले गुरुवार से लगता है। मेला परिसर बाबा सहस्त्रलिंगेश्वर महादेव व ख्याति प्राप्त सूफी संत मोहब्बतशाह बाबा की मजार तथा उनके शिष्य न्यामत शाह की मजार भी स्थित है जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।
मोहब्बतशाह बाबा प्रतिदिन करते थे महादेव की पूजा
3 of 3
मंदिर के सामने बनी मोहब्बतशाह बाबा की मजार
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के सामने मोहब्बतशाह बाबा की मजार बनी हुई है। गद्दीधरों के अनुसार मोहब्बतशाह बाबा उदार व परोपकारी व्यक्ति थे। वह सहस्त्र लिंगेश्वर मंदिर में बैठकर पूजन अर्चन करते थे तथा मस्जिद में नमाज अदा करते थे। तकिया मदरसा के मौलवी इब्राईमरजा के मुताबिक, उनका जन्म हेरात ईराक में हुआ था। जन्म के बारे में कोई प्रमाणिक अभिलेख भले ही उपलब्ध न हो लेकिन उनका अंतिम समय बीघापुर तहसील स्थित तकिया में ही बीता। तकिया के गद्दीधरों की परंपरा के वर्तमान अली हुसैनशाह 18 वें गद्दीधर हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।