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फिल्मी कहानी से कम नहीं है इस मंदिर का राज,व्हेल मछली की हड्डियों की होती है पूजा

Fri, 12 May 2017 05:11 PM IST
amarujala.com- written by: किरण सिंह
amarujala.com- written by: किरण सिंह Updated Fri, 12 May 2017 05:11 PM IST
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worship of Whale Fish Bones

आपने देवी देवताओं के तो अनेको मंदिर देखे होंगे, लेकिन देश के इस अनोखे मंदिर को आपने आज तक ना देखा होगा और ना ही इसके बारे में सुना होगा। गुजरात के वलसाड़ में ऐसा मंदिर है जहां व्हेल मछली की हड्डियों की पूजा होती है। इस मंदिर को मत्‍स्य माताजी के नाम से जाना जाता है। जानिए आखिर कैसे शुरू हुई यहां पर व्हेल मछली की हड्डियों की पूजा।

worship of Whale Fish Bones

गुजरात के वलसाड़ तहसील के मगोद डुंगरी गांव में स्थित इस मंदिर के प्रति लोगों को काफी विश्वास है। खासकर मछुआरों का। समुद्र में मछली पकड़ने जाने से पहले सभी मछुआरे इस मंदिर पर माथा टेकते हैं।

worship of Whale Fish Bones

माना जाता है कि 300 वर्ष पहले यहां पर रहने वाले प्रभु टंडेल नाम के एक व्यक्ति ने सपने में देखा कि एक व्हेल मछली समुद्र के किनारे मृत अवस्‍था में है, लेकिन जब उसने सुबह समुद्र के पास देखा तो व्हले मछली उसी अवस्‍था में वहां पड़ी थी। टंडेल ने अपने सपने की बात गांव वालों  को बताई कि देवी मां व्हेल मछली का रूप लेकर किनारे तक आ रही थी और आते ही उनकी मौत  हो गई। तब व्हेल  को दैवीय अवतार मानकर गांव में मंदिर का निर्माण करवाया गया। आज भी इस मंदिर का संचालन टंडेल परिवार ही कर रहा है।

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worship of Whale Fish Bones

मंदिर निर्माण से पहले व्हेल को मिट्टी में दफना दिया गया और मंदिर निर्माण के बाद हड्डियों को निकालकर उसे मंदिर में स्‍थापित कर दिया गया। इसके बाद गांव वाले वहां पूजा अर्चना करने लगे।

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worship of Whale Fish Bones

हालांकि कुछ ग्रामीण टंडेल के इस विश्वास के खिलाफ थे और मजाक उड़ाया। इसके कुछ दिनों बाद ही गांव में भंयकर बीमारी फैल गई। टंडेल के कहने पर लोगों ने इसी मंदिर में मन्नत मांगी। जिसके बाद सभी अपने आप ठीक होते गए। जब से आज तक यहां पर रोज पूजा होने लगी।

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