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29 अक्तूबर को रखा जाएगा वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और 7 जरूरी नियम

Tue, 27 Oct 2026 08:11 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 27 Oct 2026 08:11 AM IST
सार

Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026: वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के दौरान किन 7 गलतियों से बचना चाहिए।

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Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi and 7 Mistakes to Avoid
संकष्टी चतुर्थी - फोटो : Amar Ujala

Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस अवसर पर विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भक्तों को विघ्नहर्ता गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अक्तूबर महीने में आने वाली वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करते हैं तथा रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करते हैं।

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Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi and 7 Mistakes to Avoid
Ganesh Chaturthi - फोटो : freepik

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?

पंचांग संबंधी दी गई जानकारी के अनुसार, वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 अक्तूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को सुबह 1:06 बजे शुरू होकर रात 10:09 बजे समाप्त होने का उल्लेख है।

  • व्रत की तारीख: 29 अक्तूबर 2026, गुरुवार

  • गणेश पूजा का बताया गया समय: शाम 5:38 बजे से 6:58 बजे तक

  • अनुमानित चंद्रोदय: रात 8:17 बजे

Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi and 7 Mistakes to Avoid
Ganesh Chaturthi - फोटो : freepik

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि

  • गणेश जी का पूजन करें: भगवान को फूल, दूर्वा, अक्षत और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें।
  • भोग लगाएं: गणेश जी को मोदक, लड्डू या अन्य सात्विक मिठाई का भोग लगा सकते हैं।
  • मंत्र जाप करें: भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें और गणेश चालीसा या गणेश स्तुति का पाठ करें।
  • आरती करें: शाम को भगवान गणेश की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
  • चंद्रमा को अर्घ्य दें: चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन कर जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।
  • पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और संयम को विशेष महत्व दिया जाता है।
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Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi and 7 Mistakes to Avoid
Ganesh Chaturthi - फोटो : freepik

संकष्टी चतुर्थी पर भूलकर भी न करें ये 7 काम

  • पारंपरिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता। इसके स्थान पर दूर्वा, फूल और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री का उपयोग किया जाता है।
  • संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु आमतौर पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पारण करते हैं। स्थानीय चंद्रोदय का समय पहले जान लें।
  • व्रत के दौरान मांसाहार और शराब से दूर रहने की परंपरा है। कई परिवार प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं करते। अपने धार्मिक नियमों और व्रत की परंपरा के अनुसार भोजन चुनें।
  • उपवास में फल, दूध और व्रत में अनुमत खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। अनाज, नमक और अन्य सामग्री को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए व्रत रखें और जरूरत पड़ने पर उपवास के नियमों में उचित बदलाव करें।
  • धार्मिक मान्यताओं में व्रत के दौरान मन की शांति, संयम और अच्छे व्यवहार को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किसी से कटु वचन कहने, झगड़ा करने या दूसरों का अपमान करने से बचें।
  • कुछ परंपराओं में पूजा के समय काले वस्त्र पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसे सभी परंपराओं में अनिवार्य नियम नहीं माना जाता। स्वच्छ और आरामदायक कपड़े पहनकर श्रद्धापूर्वक पूजा करना अधिक महत्वपूर्ण है।
  • कुछ धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश की प्रतिमा के पीछे की ओर से दर्शन करने से बचने की सलाह दी जाती है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार इसका पालन करते हैं। इसे सार्वभौमिक रूप से अनिवार्य नियम नहीं समझना चाहिए।
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Ganesh Chaturthi - फोटो : freepik

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के आरंभ में पूजनीय देवता माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी पर उनकी आराधना करने के पीछे जीवन की बाधाओं को दूर करने, परिवार में सुख-शांति बनाए रखने और कार्यों में सफलता की कामना करने की धार्मिक भावना जुड़ी है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त गणेश जी की पूजा, मंत्र जाप, आरती और चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। कई श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं, जबकि कुछ अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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