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मंत्र जाप करते समय करें इन नियमों का जरूर पालन
Tue, 10 Dec 2019 11:12 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 10 Dec 2019 11:12 AM IST
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मंत्र जाप के नियम
मंत्र जाप करने के भी कुछ नियम होते हैं। यदि आप उन नियमों का पालन करेंगे तो आपके घर में न केवल सुख-शांति आयेगी, बल्कि आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। प्रस्तुत हैं मंत्र जाप के नियम-
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वाचिक जप- वाणी द्वारा सस्वर मंत्र का उच्चारण करना वाचिक जप की श्रेणी में आता है।
उपांशु जप- अपने इष्ट भगवान के ध्यान में मन लगाकर, जुबान और ओंठों को कुछ कम्पित करते हुए, इस प्रकार मंत्र का उच्चारण करें कि केवल स्वंय को ही सुनाई पड़े। ऐसे मंत्रोचारण को उपांशु जप कहते है।
मानसिक जप- मानसिक जप वो होता है जो सुखासन या पद्मासन में बैठकर ध्यान मुद्रा में अंतर्मन से किया जाता है।
उपांशु जप- अपने इष्ट भगवान के ध्यान में मन लगाकर, जुबान और ओंठों को कुछ कम्पित करते हुए, इस प्रकार मंत्र का उच्चारण करें कि केवल स्वंय को ही सुनाई पड़े। ऐसे मंत्रोचारण को उपांशु जप कहते है।
मानसिक जप- मानसिक जप वो होता है जो सुखासन या पद्मासन में बैठकर ध्यान मुद्रा में अंतर्मन से किया जाता है।
इन नियमों का भी पालन करें ....
1- शरीर की शुद्धि आवश्यक है। अतः स्नान करके ही आसन ग्रहण करना चाहिए। साधना करने के लिए हल्के रंग के कपड़ों का प्रयोग करना सर्वथा उचित रहता है।
2- साधना के लिए कुश के आसन पर बैठना चाहिए क्योंकि कुश उष्मा का सुचालक होता है। और जिससे मंत्रोचार से उत्पन्न ऊर्जा हमारे शरीर में समाहित होती है।
1- शरीर की शुद्धि आवश्यक है। अतः स्नान करके ही आसन ग्रहण करना चाहिए। साधना करने के लिए हल्के रंग के कपड़ों का प्रयोग करना सर्वथा उचित रहता है।
2- साधना के लिए कुश के आसन पर बैठना चाहिए क्योंकि कुश उष्मा का सुचालक होता है। और जिससे मंत्रोचार से उत्पन्न ऊर्जा हमारे शरीर में समाहित होती है।
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रुद्राक्ष
3- मेरूदण्ड हमेशा सीधा रखना चाहिए, ताकि सुषुम्ना में प्राण का प्रवाह आसानी से हो सके।
4- साधारण जप में तुलसी की माला का प्रयोग करना चाहिए। कार्य सिद्ध की कामना में चन्दन या रूद्राक्ष की माला प्रयोग हितकर रहता है। शिव साधना रुद्राक्ष की माला से की जानी चाहिए।
4- साधारण जप में तुलसी की माला का प्रयोग करना चाहिए। कार्य सिद्ध की कामना में चन्दन या रूद्राक्ष की माला प्रयोग हितकर रहता है। शिव साधना रुद्राक्ष की माला से की जानी चाहिए।
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5- ब्रह्रममुहूर्त में उठकर ही साधना करना चाहिए क्योंकि प्रातः काल का समय शुद्ध वायु से परिपूर्ण होता है। साधना नियमित और निश्चित समय पर ही की जानी चाहिए।
6 - जिस देवता का जप कर रहे हैं,जप करते समय उनकी छवि को ध्यान में रखना चाहिए।
6 - जिस देवता का जप कर रहे हैं,जप करते समय उनकी छवि को ध्यान में रखना चाहिए।