शिव ही आदि हैं शिव ही अनंत हैं। शिव जी ने माता पार्वती को कई ऐसी बातें बताई उन बातों को अगर अपने जीवन में अमल किया जाएं तो जीवन को सफल बनाया जा सकता हैं जो जानते हैं क्या हैं वे बातें...
Sawan 2020: भगवान शिव ने माता पार्वती को बताए थे ये रहस्य, जीवन में हैं बहुत उपयोगी
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'आत्मसाक्षी भवेन्नित्यमात्मनुस्तु शुभाशुभे।'
यानि मनुष्य को खुद ही अपने हर काम का साक्षी यानी गवाह बनना चाहिए, चाहे फिर वह कैसा भी कार्य हो चाहे अच्छा या बुरा। कोई भी काम करते समय यह विचार अपने मन में नहीं लाना चाहिए कि उसके कर्मों को कोई नहीं देख रहा है। जब व्यक्ति गलत काम करता हो तो उस समय यह सोचता है कि कोई नहीं देख रहा है और इसी कारण मनुष्य बिना किसी भय के पाप कर्म करता जाता है,परंतु सत्य कुछ और होता है। हर मनुष्य अपने सभी कर्मों का साक्षी स्वंय होता है। अगर मनुष्य अपने मन में हमेशा यही भाव मन में रखे तो वह स्वयं ही अपने आप को पाप कर्म करने से रोक सकता है।
'मनसा कर्मणा वाचा न च काड्क्षेत पातकम्।'
अर्थात् किसी भी मनुष्य को मन,वाणी और कर्म से पाप करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भोगना पड़ता है। जो धर्म-ग्रंथों के अनुसार पाप मानी गई हो ऐसी बात को भी, मनुष्य को अपने मन में लाना चाहिए, अपने मुख से कोई ऐसी बात नहीं बोलनी चाहिए और न ही ऐसा कोई कार्य करना चाहिए, जिससे दूसरों को कोई दुख पहुंचे या परेशानी हो। पाप कर्म करने वाले मनुष्य को जीवन में तो इसके परिणाम भोगने ही पड़ते हैं, मृत्यु के बाद भी नरक में यातनाएं भोगनी पड़ती हैं।
'दोषदर्शी भवेत्तत्र यत्र स्नेहः प्रवर्तते। अनिष्टेनान्वितं पश्चेद् यथा क्षिप्रं विरज्यते।।'
अर्थात् मनुष्य को जिस भी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति से लगाव हो रहा हो, जो कि उसकी सफलता में रुकावट बन रही हो, तो मनुष्य को उसमें दोष ढूंढ़ना आरंभ कर देना चाहिए। और ऐसी परिस्थिति या मनुष्य का मोह त्याग देना चाहिए।
'नास्ति तृष्णासमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्। सर्वान् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते।।'
अर्थात् मनुष्य की तृष्णा यानि इच्छाओं से बड़ा कोई दुःख नहीं होता और इनकी त्याग करने से बड़ा कोई सुख नहीं है। मनुष्य का अपने मन पर वश नहीं कर पाता है, इसलिए व्यक्ति के मन में अनावश्यक इच्छाएं जन्म लेती हैं, और यही इच्छाएं मनुष्य के दुःखों का कारण बनती हैं। अतः मनुष्य अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं में अंतर समझना आवश्यक होता है,, इन इच्छाओं का त्याग करके शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहिए।