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बिल्व पत्र चढ़ाने से सारे कष्ट होते हैं दूर, लेकिन बिल्व पत्र से जुड़ी ये पांच बातें जानना हैं जरूरी

Fri, 07 Aug 2020 11:09 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 07 Aug 2020 11:09 AM IST
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बिल्वपत्र से जुड़ी आवश्यक बातें

भगवान शिव को आशुतोष भी कहा जाता है क्योंकि वे एक बेलपत्र चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। बिल्व पत्र भगवान शिव को अति प्रिय है। बिल्व पत्र को स्वयं भगवान शिव का प्रतीक माना गया है। बिल्व पत्र की तीनों पत्तयों को शिव जी के त्रिनेत्रों का प्रतीक भी कहा जाता है। जो लोग बिल्व वृक्ष की जड़ में शिवलिंग रखकर उसका पूजन अभिषेक करते हैं तो उनके घर में हमेशा सुख बना रहता है। शिव पुराण में भी इसका जिक्र किया गया है, लेकिन शिव जी को बिल्व पत्र चढ़ाने से पहले इन बातों को जानना आवश्यक है।

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बिल्वपत्र तोड़ने के नियम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

बिल्व पत्र को तोड़ते समय सबसे पहले भगवान शिव का ध्यान करें उसके बाद ही बिल्वपत्र तोड़े। बिल्व पत्र तोड़ते समय इस मंत्र का उच्चारण करें।

अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रियःसदा। गृह्यामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात्॥

अर्थात् अमृत से उत्पन्न सौंदर्य व ऐश्वर्यपूर्ण वृक्ष महादेव को हमेशा प्रिय है। भगवान शिव की पूजा के लिए हे वृक्ष मैं तुम्हारे पत्र तोड़ता हूं।

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बिल्वपत्र तोड़ने के नियम (सांकेतिक तस्वीर)

इन तिथियों को बिल्वपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। लिंगपुराण में कहा गया है कि

अमारिक्तासु संक्रान्त्यामष्टम्यामिन्दुवासरे ।
बिल्वपत्रं न च छिन्द्याच्छिन्द्याच्चेन्नरकं व्रजेत ॥

अर्थात् अमावस्या, संक्रांति, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी तिथियों तथा सोमवार को बिल्व-पत्र नहीं तोड़ना चाहिए।

 

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शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : social media

बिल्व पत्र चढ़ाते समय ध्यान रहे कि बिल्व पत्र कहीं से भी कटे फटे न हो। बिल्व पत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए

'त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम।
 त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम।

अर्थात् हे तीन गुणों, तीन नेत्र, त्रिशूल को धारण करने वाले शिव जी में आपको तीन जन्मों के पापों का संहार करने वाले शिव में आपको बिल्वपत्र अर्पण करता हूं। 

 

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इन तिथियों को न तोड़े बिल्वपत्र(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : amar ujala

बिल्व पत्र तोड़ते समय ये बातें भी रखें ध्यान

बिल्व पत्र को कभी भी टहनियों के साथ नहीं तोड़ना चाहिए। बिल्वपत्र के एक-एक त्रिदल को तोड़ना चाहिए। बिल्व पत्र तोड़ते समय सावधानी रखें कि वृक्ष को कोई क्षति न हो।बिल्व पत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को प्रणाम करना चाहिए। सोमवार और विशेष पर्वों पर बिल्व पत्र न तोड़े।

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