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Ramadan 2018: रमजान से जुड़े ऐसे 5 झूठ जो हर किसी को सच लगते हैं, आप नहीं जानना चाहेंगे...
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 06 Jun 2018 09:46 AM IST
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17 मई से 15 जून तक चलने वाले रमजान के पाक महीनें में ज्यादातर मुसलमान रोजे रखते हैं। 30 दिन तक चलने वाले इन रोजों के बाद ईद का त्योहार मनाया जाता है। जिसे ईद-उल-फितर या मीठी ईद भी कहा जाता है। आइए आज आपको रमजान से जुड़े ऐसे 5 झूठ के बारे में बताते हैं जिन्हें कई लोग सच समझते रहते हैं।
रमजान के महीने ब्रश नहीं करना चाहिए
कई लोगों का मानना है कि रमजान के महीने में दांतों को साफ या कुल्ला नहीं करना चाहिए लेकिन ये गलत बात है। दरअसल नमाज अदा करने वालों के लिए इस्लाम में 'मिसवाक' (दातून) से दांतों को साफ करना जरूरी माना गया है।
कई लोगों का मानना है कि रमजान के महीने में दांतों को साफ या कुल्ला नहीं करना चाहिए लेकिन ये गलत बात है। दरअसल नमाज अदा करने वालों के लिए इस्लाम में 'मिसवाक' (दातून) से दांतों को साफ करना जरूरी माना गया है।
हर किसी के लिए रोजे जरूरी
इस्लाम में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि रोजे हर मुस्लिम के लिए रखना जरूरी है। बता दें, बीमार लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग और लंबा सफर कर रहे लोगों के लिए रोजा रखना जरूरी नहीं है।इसका मतलब कोई भी व्यक्ति जो शारीरिक रूप से खुद को कमजोर महसूस करता हो रोजे छोड़ सकता है।
इस्लाम में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि रोजे हर मुस्लिम के लिए रखना जरूरी है। बता दें, बीमार लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग और लंबा सफर कर रहे लोगों के लिए रोजा रखना जरूरी नहीं है।इसका मतलब कोई भी व्यक्ति जो शारीरिक रूप से खुद को कमजोर महसूस करता हो रोजे छोड़ सकता है।
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रोजेदार के सामने खाना नहीं खाना चाहिए
रोजे के दौरान लोग कुछ नहीं खाते इसलिए लोगों का मानना है कि रोजेदारों के सामने कुछ नहीं खाना चाहिए। इस्लाम के मुताबिक रमजान के महीने को खुद पर संयम रखने का महीना माना जाता है।
रोजे के दौरान लोग कुछ नहीं खाते इसलिए लोगों का मानना है कि रोजेदारों के सामने कुछ नहीं खाना चाहिए। इस्लाम के मुताबिक रमजान के महीने को खुद पर संयम रखने का महीना माना जाता है।
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पीरियड्स के दौरान रोजे टूट जाते हैं
रमजान के महीने में कहा जाता है कि जो भी महिला इस दौरान पीरियड्स से होती है उसके रोजे खराब हो जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं होता है। पीरियड्स से होने वाली महिला अगर इस दौरान अपना कोई रोजा छोड़ती है तो उसे ईद के बाद पूरा कर सकती है।
रमजान के महीने में कहा जाता है कि जो भी महिला इस दौरान पीरियड्स से होती है उसके रोजे खराब हो जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं होता है। पीरियड्स से होने वाली महिला अगर इस दौरान अपना कोई रोजा छोड़ती है तो उसे ईद के बाद पूरा कर सकती है।