Makar Sankranti 2020- मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा। धर्म और ज्योतिष के नजरिए से यह पर्व बेहद खास है। यहां मकर से आशय राशिचक्र की दसवीं राशि मकर से है। जबकि संक्रांति का अर्थ सूर्य का गोचर है। अर्थात मकर राशि में सूर्य का गोचर ही मकर संक्रांति कहलाता है। सरल शब्दों में कहें तो इस दिन सूर्य मकर राशि में जाता है।
Makar Sankranti 2020: इस दिन मनाई जाएगी मकर संक्रांति, धर्म और ज्योतिष के नजरिए से है खास पर्व
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ज्योतिष में सूर्य ग्रह का मकर राशि में प्रभाव
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, ऊर्जा, पिता, नेतृत्वकर्ता, सम्मान, राजा, उच्च पद, सरकारी नौकरी आदि का कारक माना जाता है। यह सिंह राशि का स्वामी है। तुला राशि में यह नीच का होता है, जबकि मेष राशि में यह उच्च का होता है। सूर्य के मित्र ग्रहों में चंद्रमा, गुरु और मंगल आते हैं। जबकि शनि और शुक्र इसके शत्रु ग्रह हैं। सूर्य और मकर के संबंध को देखें तो मकर सूर्य के शत्रु शनि की राशि है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। सूर्य का उत्तरायण होना बेहद शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।
इस दिन दान-पुण्य एवं स्नान का भी है महत्व
इस मौके पर लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पावन नदियों के तट पर स्नान और दान, धर्म करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि, जो मनुष्य मकर संक्रांति पर देह का त्याग करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह जीवन-मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता है।
सिद्धि प्राप्ति के लिए है ये खास दिन
ऐसी मान्यता है कि जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर चलता है, इस दौरान सूर्य की किरणों को खराब माना गया है, लेकिन जब सूर्य पूर्व से उत्तर की ओर गमन करने लगता है, तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं। इस वजह से साधु-संत और वे लोग जो आध्यात्मिक क्रियाओं से जुड़े हैं उन्हें शांति और सिद्धि प्राप्त होती है।