नये साल में नये कपड़े, नये पकवान, नई जगहों का भ्रमण, और हर साल की तरह - नये संकल्प, नये लक्ष्य। प्रत्येक साल हमारे संकल्प और लक्ष्य कुछ ही दिनों में कोरी बात बनकर रह जाते हैं। नया चाहिए तो सबको, पर शायद मिलता किसी को नहीं। क्या कारण है? क्यों जीवन को एक नया रंग-ढंग देने के हमारे सभी संकल्प समय के साथ फ़ीके पड़ जाते हैं? क्यों कुछ नया पाने की चाह में हम पुराने को ही दोहरा जाते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारे संकल्पों की गुणवत्ता में ही कमी है।
Resolution of 2019 : जानें किन 10 संकल्पों के बगैर अधूरा है आपका नया साल
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1.
एक डायरी बनायें, जिसमें नियम से रोज़ रात को लिखें कि दिन के कितने मिनट अपनी समझ, अपने होश, अपनी मुक्ति के लिए बिताए। उसी डायरी में रोज़ ये लिखें कि कितने काम थे जो आपको नहीं करने चाहिए थे, पर बाहरी प्रभाव में आकर आप वो काम कर गये। ईमानदारी से सारे कामों का विवरण लिखा करें। कितने काम नहीं होने चाहिए थे, पर लालच करा गया, डर करा गया, देह करवा गयी, हॉर्मोन्स करवा गए। ये दोनों हिसाब हर हफ्ते किसी ऐसे को दिखायें जिसको दिखाने में खतरा हो। जो तुम्हारी पोल-खोलकर रख दे, जो तुम्हें आईना दिखा सके। जो लिखा है, उसको हफ्ते-दर-हफ्ते नियमबद्ध तरीके से किसी ऐसे को दिखायें जो निर्भीक होकर आपकी वस्तुस्थिति पर प्रकाश डाल सके। वो कोई भी हो सकता है, अभिभावक, मित्र या गुरु।
2.
अपने मासिक खर्चे में से इसका हिसाब रखें कि अपनी मुक्ति पर कितना खर्च कर रहे हैं। महीने भर में जितना भी खर्च करा। उसमें से कितना पेट पर, कितना खाल पर, कितना गर्व पर, कितना मोह पर, कितना कामवासना पर खर्च करा, और ये सब करने के बाद ये देखें कि कुछ बचा भी मुक्ति पर खर्च करने के लिए!
3.
समय को देख लिया, धन को देख लिया, अब अपनी उपस्थिति को देखें। महीने भर में आपकी जहाँ कहीं भी मौजूदगी रही, आपकी मौजूदगी का कितना प्रतिशत आपने मुक्ति के लिए रखा? आप यहाँ भी पाए जाते हैं, आप वहाँ भी पाए जाते हैं, क्या किसी जगह पर अपनी मुक्ति के लिए भी पाए गए? इसमें फिर यात्रा आ जाती है...तो क्या आपने अपनी मुक्ति के लिए यात्रा करी? क्योंकि यात्रा तो आप करते ही हो, घर से दफ्तर तक की, दफ्तर से बाज़ार तक की, बाज़ार से घर तक की, रिश्तेदारों के घर तक की। ये भी तो यात्राएं हीं हैं, तो इन यात्राओं में मुक्ति के लिए कौन-सी यात्रा की, इसका साफ़-साफ़ हिसाब रखें।
4.
प्रत्येक सप्ताह अपने लिए किसी ग्रंथ (उपनिषद्, संतों के वचन आदि) के कुछ अध्याय निर्धारित करें और डायरी में ईमानदारी से लिखें कि जितना निर्धारित किया, उतना पढ़ा कि नहीं पढ़ा। जो पढ़ें उसके नोट्स उसी डायरी में लिखें।