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इस सती के साथ भगवान विष्णु ने किया था छल, मिला पत्थर हो जाने का श्राप
Sun, 14 May 2017 04:59 PM IST
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
Updated Sun, 14 May 2017 04:59 PM IST
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क्या आपने कभी सोचा है कि भगवती तुलसी के साथ शालिग्राम की पूजा क्यों होती है। कहीं आप भी तो ऐसा नहीं मानते कि तुलसी ही माता लक्ष्मी है और शालिग्राम पत्थर भगवान विष्णु का रूप है। शालिग्राम जरूर भगवान विष्णु का ही रूप है, लेकिन मां तुलसी माता लक्ष्मी का रूप नहीं है। एक श्राप के चलते भगवान विष्णु ने पत्थर का रूप लिया था और ये श्राप दिया था मां तुलसी ने। जानिए इसके पीछे की कहानी
राजजलंधर से हुआ था इनका विवाह
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पौराणिक कथा के अनासार राक्षस कुल में जन्मी वृंदा नाम की एक कन्या थी, जो भगवान विष्णु की परम भक्त थी। जब वृंदा बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राजजलंधर से हुआ। पतिव्रता वृंदा अपने पति की खूब सेवा करती थी।
पति की जीत के लिए किया अनुष्ठान
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एक बार देवताओं और दानवों में युद्घ हुआ और जब जलंधर युद्घ पर जाने लगा तो वृंदा ने कहा कि वे जब तक वे विजयी होकर वापस नहीं आएंगे, वो अनुष्ठान करेंगी और इस संकल्प के साथ वृंदा पूजा में बैठ गई। उनके व्रत के प्रभाव के कारण देवता जलंधर से हार रहे थे। ऐसे में सभी देवता मदद के लिए भगवान विष्णु के पास गए। तब भगवान विष्णु ने कहा कि वृंदा मेरी परम भक्त है और मैं उसके साथ छल नहीं कर सकता, लेकिन कोई दूसरा रास्ता ना होने के कारण भगवान विष्णु देवताओं की मदद के लिए तैयार हो गए।
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ऐसे हराया जलंधर को
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माना जाता है कि भगवान ने जलंधर का ही रूप लिया और वृंदा के महल में पहुंच गए और जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा से उठ गई और उनके चरण छू लिए और इसी के साथ वृंदा का संकल्प टूटते ही युद्ध में देवताओं ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काटकर अलग कर दिया। जलंधर का सिर सीधे महल में वृंदा के सामने गिरा। अपने पति का कटा सिर देखकर जब उन्होंने पूछा तो भगवान अपने असली रूप में आ गए।
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गुस्से में दिया भगवान को श्राप
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सारी बात समझ आने पर वृंदा ने भगवान को श्राप दे दिया कि आप पत्थर के हो जाओ और भगवान उसी समय पत्थर के हो गए। जिस कारण देवताओं में हाहाकर मच गया। ऐसे में देवी लक्ष्मी के प्रार्थना करने के बाद वृंदा ने भगवान को पहले जैसा ही कर दिया।
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