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Adhik Mass 2020: अधिक मास में हो सकते है ये सात तरह के संस्कार

Mon, 21 Sep 2020 07:41 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 21 Sep 2020 07:41 AM IST
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Adhik Mass 2020 thsese seven sanskar may perform during the adhik mass
अधिकमास 2020: भगवान विष्णु को समर्पित है ये महीना - फोटो : adhikmaas

अधिक मास प्रारंभ हो चुका है। यह महीना 18 सितंबर से शुरू हुआ था जो 16 अक्टूबर को समाप्त होगा। अधिक मास को मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। अधिक मास के कारण इस बार दो आश्विन मास पड़े हैं। साथ ही चतुर्मास भी पांच महीनो का हो गया है और नवरात्रि जो श्राद्ध पक्ष की समाप्ति के साथ ही शुरू हो जाती थी वह भी एक महीने पीछे खिसक गई है।

Adhik Mass 2020 thsese seven sanskar may perform during the adhik mass
अधिकमास 2020: मलमास हो चुका है शुरू - फोटो : adhikmaas

हिन्दू पंचांग की गणना के अनुसार, सौर वर्ष का मान लगभग 365 दिनों का और चंद्र मास 354 दिनों का होता है। दोनों में करीब 11 दिनों के अंतर को समाप्त करने के लिए 32 माह में अधिक मास की योजना बनाई गई है, जो पूर्णतः विज्ञान सम्मत भी है।

Adhik Mass 2020 thsese seven sanskar may perform during the adhik mass
अधिक मास में होती है विष्णु जी की पूजा - फोटो : सोशल मीडिया

पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस मास में जो भगवान विष्णु का पूजन करता है उसे कई गुना फल की प्राप्ति होती है।

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Adhik Mass 2020 thsese seven sanskar may perform during the adhik mass
अधिक मास में नहीं होते हैं मांगलिक कार्य - फोटो : self

धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिक के अनुसार अधिक मास में सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस महीने शादी, सगाई, जडुला, गृह निर्माण आरम्भ, गृहप्रवेश, मुंडन, संन्यास अथवा शिष्य दीक्षा लेना, नववधू का प्रवेश, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, यज्ञ, बड़ी पूजा-पाठ का शुभारंभ, कूप, बोरवेल, जलाशय खोदने जैसे पवित्र कार्य नहीं किए जाते हैं। हालांकि इस महीने कुछ ऐसे संस्कार हैं जिन्हें करने से जातकों को उसका सर्वाधिक लाभ भी मिलता है।

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Adhik Mass 2020 thsese seven sanskar may perform during the adhik mass
अधिक मास में नहीं होती हैं शादियां - फोटो : सोशल मीडिया

शास्त्रों के अनुसार, पुरुषोत्तम माह में पुंसवन, सीमंत, जातकर्म, नामकरण, भूमि उपवेशन आदि संस्कार किए जा सकते हैं। दरअसल, गर्भाधान के दूसरे या तीसरे महीने में पुंसवन संस्कार और छठे आठवें महीने में सीमंत संस्कार किये जाते हैं। 

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