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सिर्फ भाई बहन का प्यार नहीं, इन 7 कारणों से मनाते हैं रक्षाबंधन
Thu, 18 Aug 2016 12:44 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Thu, 18 Aug 2016 12:44 AM IST
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- फोटो : Getty Images
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रक्षाबंधन के त्योहार को आमतौर पर भाई बहनों का त्योहार माना जाता है लेकिन इस त्योहार को मनाने का महज यही कारण नहीं है, इसके पीछे और भी कई वजहें हैं।
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राखी
रक्षाबंधन के त्योहार के बारे में पुराणों में जिस तरह की कथा मिलती है उसके अनुसार रक्षासूत्र यानी राखी का निर्माण करने वाली देवी शचि हैं। यह देवराज इंद्र की पत्नी हैं। भविष्य पुराण की कथा के अनुसार देवलोक पर असुरों ने अक्रमण कर दिया। युद्ध में असुरों का प्रभाव बढ़ता जा रहा था। ऐसे समय में देवराज इंद्र की रक्षा के लिए देवी शचि ने कच्चे धागे को अभिमंत्रित करके श्रावण पूर्णिमा के दिन देवराज इंद्र की कलाई में बांध दिया। इसके बाद इंद्र ने असुरों को पराजित कर दिया। इस कथा के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ भाई बहनों का त्योहार नहीं है। दरअसल आप जिनकी सुरक्षा की कामना करते हैं उन्हें राखी बंध सकते हैं।
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लक्ष्मी देवी
दूसरी कथा वामन पुराण में मिलती है। इस पुराण में राखी के बारे में जो कथा मिलती है उसके बाद से राखी भाई बहनों का त्योहार बन गया। इस पुराण में बताया गया है कि भगवान विष्णु के वामन अवतार को राजा बलि अपने साथ पाताल लेकर चले गए। वामन बने भगवान विष्णु अपने दिए वरदान के कारण पाताल को छोड़कर बैकुंठ नहीं जा सकते थे। ऐसे में देवी लक्ष्मी ने श्रावण महीने की पूर्णिमा तिथि को एक बूढ़ी महिला का भेष बनाया और पहुंच गयी पाताल लोक में राजा बलि के पास। राजा बलि ने गरीब और कमजोर बूढ़ी स्त्री को देखा तो उसे बहन बना लिया। देवी लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई में रेशम के धागे बांधे तो राजा बलि ने उपहार मांगने के लिए कहा। देवी लक्ष्मी ने झट से वामन को वरदान के बंधन से मुक्त करके बैकुंठ लौट जाने का आशीर्वाद मांग लिया। इस तरह देवी लक्ष्मी ने राखी को भाई बहन का त्योहार बना दिया।
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श्री कृष्ण
राखी को लेकर महाभारत में एक कथा का उल्लेख है जिसमें एक साख्य भाव से रक्षा बंधन मनाने का जिक्र आया है। शिशुपाल के वध के समय अपने ही सुदर्शन चक्र से श्री कृष्ण की उंगली कट गई। हलांकि यह भगवान श्री कृष्ण की लीला ही थी लेकिन द्रौपदी ने जब देखा कि वासुदेव श्री कृष्ण की उंगली में खून टपक रहा है तो उन्होंने झट से अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और श्री कृष्ण की उंगली में बांध दिया जिससे खूब का टपकना बंद हो गया। यह घटना भी सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ माना जाता है।
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महाभ्ाारत
राखी का त्योहार मनाने का एक अन्य कारण भी महाभारत में दिया गया है। यह कथा है महाभारत युद्ध के समय का। कथा है कि भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि तुम्हारी रक्षा करने वाले तुम्हारे सैनिक हैं। इसलिए इनके साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाओ। श्री कृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने अपने सैनिकों के संग राखी का त्योहार मनाया। यही कारण है कि आज भी लोग सैनिकों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं।
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