हिंदू धर्म में जगन्नाथपुरी का वर्णन स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में कई जगह किया गया है। जिसमें बताया गया है कि कई पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि के बीच विशाल रथों को सैकड़ों लोग मोटे-मोटे रस्सों से खींचते हैं। बता दें, सबसे पहले भाई बलराम जी का रथ प्रस्थान करता है। जिसके थोड़ी देर बाद बहन सुभद्रा जी का रथ चलना शुरू होता है।अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी ये 5 रोचक बातें शायद ही जानते होंगे आप
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बारिश-
इस बात पर शायद ही किसी ने गौर किया हो कि भगवान जगन्नाथ देव की रथ यात्रा के दिन बारिश जरूर होती है। आज तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि इस दिन बारिश न हुई हो।भगवान की यात्रा का ये उत्सव आषाढ़ शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है।
राजा करता है सफाई-
जब से जगन्नाथ रथयात्रा आरंभ हुई है तब से ही राजाओं के वंशज पारंपरिक ढंग से सोने के हत्थे वाली झाडू से भगवान जगन्नाथ जी के रथ के सामने झाडु लगाते हैं। जिसके बाद मंत्रोच्चार एवं जयघोष के साथ रथयात्रा शुरू की जाती है। हालांकि अब भारत में कोई राजा नहीं होने की वजह से खास पुरी में एक 'Official' राजा बनाया गया हैं जो मंदिर के बाहर का रास्ता सोने से बने पोछे से साफ करता है. इसके बाद ही भगवान को मंदिर से निकाला जाता है।
भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में ये ऐसा त्यौहार है जहां भगवान खुद ही घूमने निकल जाते हैं।जिनकी रथ यात्रा में भारी संख्या में लोग मौजूद होते हैं।
माना जाता है कि भगवान जग्गनाथ रस्ते में एक बार अपना पसंदीदा पोड़ा पीठा खाने के लिए जरूर रुकते हैं। ओडिसा में बनने वाले इस मीठी डिश को आपको भी जरूर टेस्ट करना चाहिए।