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मकर संक्रांति पर पतंगबाजी और गंगा स्नान की परंपरा इस तरह शुरु हुई

Fri, 13 Jan 2017 04:56 PM IST
राकेश्ा झा/टीम डिजिटल
राकेश्ा झा/टीम डिजिटल Updated Fri, 13 Jan 2017 04:56 PM IST
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makar sankranti ganga snan and kite contest story
मकर संक्रांत‌ि

मकर संक्रांत‌ि का त्योहार पूरे देश में बहुत ही उत्साह उल्लास और श्रद्धा से मनाया जाता है। इस मौके पर देश के कई भागों में खेल और प्रत‌ियोग‌िताओं का आयोजन होता है इनमें पतंग उड़ाने की परंपरा बहुत ही प्रचीन है। इस त्योहार में गंगा स्‍नान की भी बड़ी मान्यता है। और सबसे बड़ी बात यह है क‌ि इनका पौराण‌िक कथाओं से बड़ा गहरा नाता है।

मकर संक्रांत‌ि पर पतंगबाजी और गंगा स्नान की परंपरा इस तरह शुरु हुई

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गजरौला के ब्रजघाट पर पूर्णिमा पर स्नान का नजारा । - फोटो : amar ujala

मकर संक्रांत‌ि के द‌िन सबसे ज्यादा महत्व स्नान और दान का है इसल‌िए हम सबसे पहले गंगा स्नान की बात करते हैं। यूं तो शास्‍त्रों में हर धार्म‌िक अवसर पर गंगा स्नान की बात कही गई है लेक‌िन कार्त‌िक पूर्ण‌िमा, गंगा दशहरा और मकर संक्रांत‌ि के द‌िन गंगा स्नान का बहुत ही महत्व है।

मकर संक्रांत‌ि पर पतंगबाजी और गंगा स्नान की परंपरा इस तरह शुरु हुई

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मकर संक्रांत‌ि

मकर संक्रांत‌ि के द‌िन गंगा स्नान का महत्व उस समय से माना जाता है जब पहली पर गंगा पृथ्वी पर आई और महाराज भग‌ीरथ के पीछे-पीछे चलते हुए कप‌िल मुन‌ि के आश्रम में आकर सगर के पुत्रों का उद्धार क‌िया और सागर से म‌िल गई। यही कारण है क‌ि बंगाल के गंगासागर में मकर संक्रांत‌ि के द‌िन बड़ा व‌िशाल मेला लगता है और देश-व‌िदेश से श्रद्धालु आकर गंगासगर में डुबकी लगाते हैं। ऐसी कहावत है क‌ि मकर संक्रांत‌ि के द‌िन गंगासागर में डुबकी लगाने से सभी तीर्थों में यात्रा का पुण्य म‌िल जाता है और व्यक्त‌ि के कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं।

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पतंग

जहां तक मकर संक्रांत‌ि के द‌िन पतंग उड़ाने की परंपरा की बात है तो इसका संबंध भगवान राम से माना जाता है। तुलसी दास जी ने राम चरित मानस में भगवान श्री राम के बाल्यकाल का वर्णन करते हुए ल‌िखा है क‌ि भगवान राम ने भी पतंग उड़ायी थी। ज‌िसे तुलसीदास जी इस तरह ल‌िखते हैं-  राम इक दिन चंग उड़ाई। इंद्रलोक में पहुंची जाई।। तमिल की तन्दनानरामायण में भी इस घटना का जिक्र किया गया है। इस रामायण के अनुसार मकर संक्रांति ही वह पावन दिन था जब भगवान श्री राम और हनुमान जी की मित्रता हुई थी। मकर संक्राति के दिन राम ने जब पतंग उड़ायी तो पतंग इन्द्रलोक में पहुंच गयी।

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पतंग

पंतंग को देखकर इन्द्र के पुत्र जयंती की पत्नी सोचने लगी कि, जिसकी पतंग इतनी सुन्दर है वह स्वयं कितना सुंदर होगा। भगवान राम को देखने की इच्छा के कारण जयंती की पत्नी ने पतंग की डोर तोड़कर पतंग अपने पास रख ली। भगवान राम ने हनुमान जी से पतंग ढूंढकर लाने के लिए कहा। हनुमान जी इंद्रलोक पहुंच गये। जयंत की पत्नी ने कहा कि जब तक वह राम को देखेगी नहीं पतंग वपस नहीं देगी।

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