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Prayagraj kumbh 2019 : सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही हुआ देवों का प्रयाग आगमन
Sat, 12 Jan 2019 02:03 PM IST
Ayush Jha
पं.जय गोविन्द शास्त्री
पं.जय गोविन्द शास्त्री
Published by: Ayush Jha
Updated Sat, 12 Jan 2019 02:03 PM IST
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Makar Sankranti 2019
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सूर्यदेव 14 जनवरी की शायं 07 बजकर 50 मिनट पर में मकर राशि में प्रवेश करते ही उत्तरायण हो जायेंगे, जिसके फलस्वरुप सभी मांगलिक कार्य यज्ञोपवीत, शादी -विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्य आरम्भ हो जायेंगे। सूर्य का मकर राशि में आना पृथ्वीवासियों के लिए हमेशा वरदान की तरह होता है, क्योंकि श्रृष्टि के सभी देवी-देवता यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर आदि सूर्य के मकर राशि की यात्रा के समय पृथ्वी पर प्रयाग तीर्थ में एकत्रित होकर गंगा यमुना सरस्वती के पावन संगम तट पर स्नान कर जप, तप, पूजा पाठ और दान पुण्य करके अपना जीवन धन्य करते हैं।
कुंभ मेला 2019
शास्त्र कहते हैं कि प्रयाग तीर्थ में एक माह की तपस्या देवलोक में एक कल्प तक निवास का अवसर देती है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है कि -
माघ मकर रविगत जब होई। तीरथ पति आवहिं सब कोई।।
देव दनुज किन्नर नर श्रेणी। सादर मज्जहिं सकल त्रिवेणी।।
एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।।
अर्थात - सूर्य की मकर राशि की यात्रा का शुभफल अमोघ हैं, इस माह में किसी भी तीर्थ, नदी अथवा समुद्र में स्नानकरके दान पुण्य करके जीवात्मा कष्टों से मुक्ति पा सकती है किन्तु प्रयाग तीर्थ के मध्य दैव संगम का फल सभी कष्टों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष देने में सक्षम है।
माघ मकर रविगत जब होई। तीरथ पति आवहिं सब कोई।।
देव दनुज किन्नर नर श्रेणी। सादर मज्जहिं सकल त्रिवेणी।।
एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।।
अर्थात - सूर्य की मकर राशि की यात्रा का शुभफल अमोघ हैं, इस माह में किसी भी तीर्थ, नदी अथवा समुद्र में स्नानकरके दान पुण्य करके जीवात्मा कष्टों से मुक्ति पा सकती है किन्तु प्रयाग तीर्थ के मध्य दैव संगम का फल सभी कष्टों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष देने में सक्षम है।
Kumbh 2019
कल्पवास का पुण्यफल
यहां कल्पवास करके प्राणी सभी पापों से छुटकारा पा जाता है। पितरों को अर्घ्य देने एवं श्राद्ध तर्पण आदि करने से पितृश्राप से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार इस अवधि के दौरान प्रयाग तीर्थ में आठ हज़ार श्रेष्ट धनुर्र्धारी हर समय मां गंगा की रक्षा करते हैं। भगवान् सूर्य अपनी प्रिय पुत्री यमुना की, इंद्र प्रयाग की, भगवान शिव अक्षय वट की एवं मंडल की रक्षा भगवान् विष्णु करते हैं। अतः ऐसे शुभ अवसर पर ''गंगे तव दर्शनार्थ मुक्तिः'' मां गंगा के दर्शन से ही जीव को जीवन मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।
यहां कल्पवास करके प्राणी सभी पापों से छुटकारा पा जाता है। पितरों को अर्घ्य देने एवं श्राद्ध तर्पण आदि करने से पितृश्राप से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार इस अवधि के दौरान प्रयाग तीर्थ में आठ हज़ार श्रेष्ट धनुर्र्धारी हर समय मां गंगा की रक्षा करते हैं। भगवान् सूर्य अपनी प्रिय पुत्री यमुना की, इंद्र प्रयाग की, भगवान शिव अक्षय वट की एवं मंडल की रक्षा भगवान् विष्णु करते हैं। अतः ऐसे शुभ अवसर पर ''गंगे तव दर्शनार्थ मुक्तिः'' मां गंगा के दर्शन से ही जीव को जीवन मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।
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Kumbh 2019
आठ ग्रहों के दोषों का होता है शमन
यही वह अवसर है, जब लौकिक और पारलौकिक शक्तियां इकट्ठा होकर संगम तट पर अनेकानेक रूपों में वास करती हैं, जिसके फलस्वरुप यहाँ का जल स्तर बढ़ जाता है, भगवान् सूर्य के द्वारा बनाया हुआ यह अद्भुत संयोग जीवात्माओं को अपने किये गए शुभ-अशुभ कर्मों का प्रयाश्चित करने का सुअवसर देता है। भारतीय ज्योतिष मनीषी किसी भी जातक की जन्म कुंडली का फलादेश करते समय कुंडली में सूर्य की स्थिति का गंभीरता से विचार करते हैं क्योंकि, सप्त दोषं रविर्र हन्ति शेषादि उत्तरायने। कुंडली में यदि अकेले सूर्य ही बलवान हों तो सात ग्रहों का दोष शमन करदेते हैं और सूर्य यदि उत्तरायण हों तो आठ ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं, इसीलिए शास्त्र सभी प्राणियों को भगवान् सूर्य को जल देने अथवा अर्घ्य देने की सलाह देते हैं।
यही वह अवसर है, जब लौकिक और पारलौकिक शक्तियां इकट्ठा होकर संगम तट पर अनेकानेक रूपों में वास करती हैं, जिसके फलस्वरुप यहाँ का जल स्तर बढ़ जाता है, भगवान् सूर्य के द्वारा बनाया हुआ यह अद्भुत संयोग जीवात्माओं को अपने किये गए शुभ-अशुभ कर्मों का प्रयाश्चित करने का सुअवसर देता है। भारतीय ज्योतिष मनीषी किसी भी जातक की जन्म कुंडली का फलादेश करते समय कुंडली में सूर्य की स्थिति का गंभीरता से विचार करते हैं क्योंकि, सप्त दोषं रविर्र हन्ति शेषादि उत्तरायने। कुंडली में यदि अकेले सूर्य ही बलवान हों तो सात ग्रहों का दोष शमन करदेते हैं और सूर्य यदि उत्तरायण हों तो आठ ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं, इसीलिए शास्त्र सभी प्राणियों को भगवान् सूर्य को जल देने अथवा अर्घ्य देने की सलाह देते हैं।
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Surya Arghya
सूर्यदेव को अर्घ्य देने का फल
जो जीवात्मा प्रातः काल स्नान करके सूर्य को जल का अर्घ्य देती है उसे किसी भी प्रकार के ग्रहदोष से डरने कि आवश्यकता नहीं है। ऐसा करने से इनकी सहस्रों किरणों में से प्रमुख सात किरणें जिनका रंग बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल है हमारे शरीर को नई उर्जा और आत्मबल प्रदान करते हुए हमारे पापों का शमन करती हैं। इन किरणों के नाम सुषुम्णा, हरिकेश, विश्वकर्मा, सूर्य, रश्मि, विष्णु और सर्वबन्धु हैं। सम्पूर्ण जगत के मूल भगवान् सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सभी राशियों के जातकों के लिए हमेशा मंगलकारी रहता है। प्राणियों के शुभ-अशुभ कर्मों का प्रायश्चित करने के लिए मकर राशिगत सूर्य का होना अच्छा अवसर है।
जो जीवात्मा प्रातः काल स्नान करके सूर्य को जल का अर्घ्य देती है उसे किसी भी प्रकार के ग्रहदोष से डरने कि आवश्यकता नहीं है। ऐसा करने से इनकी सहस्रों किरणों में से प्रमुख सात किरणें जिनका रंग बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल है हमारे शरीर को नई उर्जा और आत्मबल प्रदान करते हुए हमारे पापों का शमन करती हैं। इन किरणों के नाम सुषुम्णा, हरिकेश, विश्वकर्मा, सूर्य, रश्मि, विष्णु और सर्वबन्धु हैं। सम्पूर्ण जगत के मूल भगवान् सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सभी राशियों के जातकों के लिए हमेशा मंगलकारी रहता है। प्राणियों के शुभ-अशुभ कर्मों का प्रायश्चित करने के लिए मकर राशिगत सूर्य का होना अच्छा अवसर है।