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संतान प्राप्ति के लिए खास है श्रावण मास की यह एकादशी, जानें कैसे करें पूजा

Sat, 10 Aug 2019 12:17 PM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत राय Updated Sat, 10 Aug 2019 12:17 PM IST
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know about puja and vrat vidhi for shravan putrada ekadshi
- फोटो : Social Media

एकादशी का महत्व महीने के दोनों ही पखवाड़े में होता है। चाहे वह कृष्ण पक्ष की एकादशी हो या फिर शुक्ल पक्ष की, सभी महीनों में कृष्ण और शुक्ल एकादशी का अपना महत्व होता है। इस खास दिन पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। सावन और पौष मास की एकादशी का महत्व एक बराबर होता है। इस खास दिन पर व्रत रखने से संतान की प्राप्ति होती है। श्रावण मास की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं श्रावण शुक्ल एकादशी की व्रत कथा व पूजा विधि के बारे में। इस बार श्रावण शुक्ल एकादशी 11 अगस्त को है।

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- फोटो : social media

श्रावण पुत्रदा एकादशी
एकादशी की तिथि 10 अगस्त को सुबह 10 बजकर 9 मिनट से शुरू होगा और इस तिथि की समाप्ति 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर खत्म होगा। वहीं द्वादशी तिथि की समाप्ति दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर 12 अगस्त को खत्म होगा। 

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श्रावण शुक्ल एकादशी व्रत तिथि
एकादशी व्रत से पहले दशमी के दिन जो महिलाएं व्रत रहती हैं उन्हें सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए। साथ ही ब्रह्मचर्य का भी पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु के बाल गोपाल रूप की पूजा करें। रात में भजन कीर्तन करने के साथ-साथ जागरण भी करना चाहिए। इसके बाद द्वादशी के दिन के सूर्योदय के साथ पूजा संपन्न करें। पूजा संपन्न करने के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन करवाएं। 

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युद्धिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से श्रावण एकादशी के महत्व को बताने का निवेदन किया तब श्री कृष्ण ने उन्हें एकादशी के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि द्वापर युग में महिष्मतीपुरी का राजा था, जिसका नाम महीजित था। वह बहुत ही शांति और धर्म प्रिय था। लेकिन उस राजा का कोई बेटा नहीं था। 

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जब महामुनि लोमेश के निर्देशानुसार प्रजा के साथ-साथ जब राजा ने भी यह व्रत रखा तो कुछ समय बाद रानी ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। तभी से इस एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाने लगा।  

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