Gandhi Jayanti 2020: हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है। देश की आजादी में बापू के अभूतपूर्व योगदान को कोई नहीं भुला सकता है। वे सत्य और अहिंसा की राह पर चलने वाले महात्मा थे। देश-दुनिया में आज भी उनके विचार जीवित हैं। हिन्दू धर्म से उनका संबंध था, लेकिन सभी धर्मों का वे सम्मान करते थे। वे राम नाम का जाप करते थे। हालांकि महात्मा गांधी धर्म परिवर्तन के विरोध में थे। उन्होंने धर्म-परिवर्तन के सभी तर्कों एवं प्रयासों को अस्वीकृत किया। आइए धर्म को लेकर उनके और क्या-क्या विचार थे इस लेख के माध्यम से जानते है।
Gandhi Jayanti 2020: धर्म के विषय में क्या सोचते थे महात्मा गांधी, जानें उनके विचार
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गांधी के अनुसार कौन है सच्चा धार्मिक
महात्मा गांधी जी के अनुसार परमात्मा का कोई धर्म नहीं होता है। जो व्यक्ति दूसरो के दुख दर्द को समझता है असली धार्मिक वही है। महात्मा गांधी सर्वधर्म समभाव पर विश्वास करते थे।
सत्य और अहिंसा पर आधारित है बापू का धर्म
धर्म के लिए लोग अपनी पूरी उम्र जीते हैं। उनका धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित था। गांधी जी के लिए सत्य ही उनका भगवान था। उनके अनुसार अहिंसा भगवान को पाने का सबसे बेहतर साधन है।
अपना धर्म ही परम सत्य है
धर्म जीवन की तुलना में अधिक है। अपना धर्म ही परम सत्य है। जो लोग कहते है की धर्म का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है वह यह नहीं जानते है की धर्म है क्या।
बापू के अनुसार ये है सच्चा धर्म
सभी सिद्धांतों को सभी धर्मों के इस तार्किक युग में तर्क की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा और सार्वभौमिक स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। किसी व्यक्ति का धर्म उसके और उसके बनाने वाले के बीच का मामला है और किसी का नहीं। वो धर्म नहीं है जो व्यावहारिक मामलों पर ध्यान नहीं देता और उन्हें हल करने में कोई मदद नहीं करता है।