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देवउठनी एकादशी 2018: साल की सबसे शुभ एकादशी आज, भूलकर भी ना करें ये 5 काम

Mon, 19 Nov 2018 11:17 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 19 Nov 2018 11:17 AM IST
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devutthan ekadashi vrat tulsi vivah importance and significance

सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी मानी जाती है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी, देवप्रबोधिनी एकादशी और डिठवन  एकादशी भी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 19 नवंबर को है। ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान विष्णु जो पिछले 4 महीनो से क्षीर सागर में सोए हुए थे वह जागते हैं। भगवान के जागते ही 4 महीनों से रूके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली इस एकादशी का व्रत करने वालों को स्वर्ग और बैकुंठ की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में देवउठनी एकादशी पर कुछ उपाय करने से जहां मोक्ष की प्राप्ति होती है तो वहीं बताए गए नियम का पालन ना करने पर दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है।




 

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देवोत्थान एकादशी पर करें ये काम
- देवोत्थान एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु नींद से जागते हैं जिसकी खुशी और स्वागत में सभी देवी-देवता दीप उत्सव मनाते हैं। ऐसे में इस दिन भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए अपने घर पर  दीप जरूर जलाएं।

- देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप और तुलसी का विवाह होता है। ऐसे में दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व हो जाता है।

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देवोत्थान एकादशी पर ना करें ये काम

- शास्त्रों में सभी 24 एकादशियों में चावल खाने को वर्जित बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से मनुष्य रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है इसलिए इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें।

 
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एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना और उनके प्रति समर्पण के भाव को दिखाता है। एकादशी के दिन खान-पान और व्यवहार में संयम और सात्विकता का पालन करना चाहिए।

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एकादशी के दिन संयम के साथ पति-पत्नी को ब्रह्राचार्य का पालन करना चाहिए इसलिए इस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनना चाहिए।

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