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अजा एकादशी आज: इस व्रत को करने से राजा हरिश्चन्द्र को दोबारा मिला था राज-पाठ

Fri, 18 Aug 2017 12:50 PM IST
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 18 Aug 2017 12:50 PM IST
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aja  ekadashi vrat 2017 its story and importance

आज अजा एकादशी है। भादो महीने में मनाई जाने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहते है। इस एकादशी को करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। कहा जाता इस एकादशी को करने से राजा हरिश्चन्द्र को अपना खोया हुआ परिवार और राज-पाठ वापस मिल गया था। इस बार यह एकादशी 18 अगस्त को मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं कि अजा एकादशी की कथा।


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भगवान श्री राम के वंश में हरिश्चन्द्र नाम के एक राजा हुए थे। राजा अपनी सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। एक बार देवताओं ने इनकी परीक्षा लेने की योजना बनाई। राजा ने स्वप्न में देखा कि ऋषि विश्वामित्र को उन्होंने अपना राजपाट दान कर दिया है।

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जब अगले दिन राजा हरिश्चन्द्र विश्वामित्र को अपना समस्त राज-पाठ को सौंप कर जाने लगे तो विश्वामित्र ने राजा हरिश्चन्द्र से दक्षिणा स्वरुप 500 स्वर्ण मुद्राएं दान में मांगी।राजा ने उनसे कहा कि पांच सौ क्या, आप जितनी चाहे स्वर्ण मुद्राएं ले लीजिए। इस पर विश्वामित्र हंसने लगे और राजा को याद दिलाया कि राजपाट के साथ राज्य का कोष भी वे दान कर चुके हैं और दान की हुई वस्तु को दोबारा दान नहीं किया जाता।

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तब राजा ने अपनी पत्नी और पुत्र को बेचकर स्वर्ण मुद्राएं हासिल की, लेकिन वो भी पांच सौ नहीं हो पाईं। राजा हरिश्चंद्र ने खुद को भी बेच डाला और सोने की सभी मुद्राएं विश्वामित्र को दान में दे दीं।

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राजा हरिश्चंद्र ने खुद को जहां बेचा था वह श्मशान का चांडाल था। चांडाल ने राजा हरिश्चन्द्र को श्मशान भूमि में दाह संस्कार के लिए कर वसूली का काम दे दिया। 

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