एकदशी के व्रत की महिमा बहुत निराली है। यह व्रत करने नष्ट होते हैं सारे बुरे कर्म नष्ट हो जाते हैं। यहां तक की पिछले जन्म के पाप कर्मों से भी मुक्ति मिलती है। साल में 24 एकादशी पड़ती हैं। अधिक मास होने पर 26 एकादशी के व्रत पड़ते हैं। एकादशी के व्रत में जगत के पालन कर्ता श्री हरि विष्णु की पूजा का प्रावधान है। एकादशी का व्रत पूरे नियमों के साथ करने से व्यक्ति के सारे संकट दूर होते हैं। परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। धन और अन्न की कोई कमी नहीं रहती है। आइए एकादशी के महात्मय के बारे में जानते हैं...
हिंदू धर्म में क्यों है एकादशी का इतना महत्व, जानिए इसके बारे में 15 खास बातें
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एक माह में दो एकादशी के व्रत पड़ते हैं। चैत्र माह में कामदा और वरुथिनी एकादशी पड़ती हैं। वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। सौभाग्य में वृद्धि होती है। कामदा एकादशी का व्रत करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मोहिनी और अपरा एकादशी का व्रत वैशाख माह में रखा जाता है। मोहिनी एकादशी का व्रत करने से विवाह से संबंधित परेशानिया दूर होती है, वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। अपरा एकादशी पापों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। इससे आपके जीवन में खुशियां आती हैं।
ज्येष्ठ माह की निर्जला एकादशी का बहुत महत्व माना गया है। इस व्रत के बारे में कहा जाता है कि यह व्रत रखने से सारे व्रत पूर्ण हो जाते हैं। हर कार्य में सिद्धि प्राप्त होती है। इस माह में योगिनी एकादशी का व्रत भी पड़ता है यह व्रत करने से पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
आषाढ़ माह में भी दो एकादशी पड़ती हैं एक का नाम देवशयनी और दूसरी का नाम कामिका है। देवशयनी का व्रत रखने पर परिवार में किसी तरह की कोई कलह नहीं रहती है।कामिका एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगले जन्म में भी कुयोनि प्राप्त नहीं होती है।