कानपुर में अंतरराष्ट्रीय अवैध किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह के भंडाफोड़ के बाद बृहस्पतिवार शाम कानपुर की स्वॉट टीम मेरठ पहुंची। टीम ने शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में डेंटल सर्जन डॉ. वैभव मुदगल और डॉ. अफजाल की गिरफ्तारी के लिए अल्फा अस्पताल में दबिश दी लेकिन दोनों ही आरोपी फरार मिले।
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छापे के दौरान खाली पड़ा अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर स्वॉट टीम ने अल्फा अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले गेट की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई। छापे के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टीम ने अस्पताल के लैब डेटा, मरीजों के रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की गहनता से जांच की। पुलिस ने साक्ष्य मिटाने की आशंका के चलते सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) और कई संदिग्ध दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।
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इस कांड में कानपुर के हैलट के सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल से किडनी के मरीजों को पीजीआई लखनऊ भेजा गया
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कानपुर पुलिस के आला अधिकारियों ने मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय से संपर्क कर सहयोग मांगा था। एसएसपी के निर्देश पर एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह की निगरानी में मेरठ पुलिस ने दबिश में मदद की। एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी डॉक्टरों के स्टाफ और स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई है। फरार आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है ताकि वे देश छोड़कर न भाग सकें।
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इस कांड में कानपुर के हैलट के सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल से किडनी के मरीजों को पीजीआई लखनऊ भेजा गया
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जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी पहले दिल्ली में किडनी ट्रांसप्लांट का काला धंधा करते थे। मेरठ में साक्ष्य जुटाने के बाद बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे टीम दिल्ली के लिए रवाना हो गई। पुलिस इस बात की तलाश कर रही है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और रिसीवर कौन लाता था और इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से सफेदपोश शामिल हैं।
अस्पताल मालिक भी रडार पर
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कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार।
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दूसरी ओर अस्पताल मालिक अमित (निवासी मुजफ्फरनगर) हालांकि मीडिया के सामने आकर अपनी सफाई पेश कर रहे हैं लेकिन पुलिस का कहना है कि उन्हें क्लीन चिट नहीं दी गई है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह के अनुसार अमित से भी टीम विस्तार से पूछताछ करेगी ताकि अस्पताल के संचालन और इन अवैध गतिविधियों की जानकारी के बारे में सच सामने आ सके।
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