5 जून को हर साल पुरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। पूरे विश्व में हर साल बड़ी संख्या में आयोजन किए जाते हैं लोगों को ये समझाने के लिए कि अगर हमें जिंदा रहना है तो प्रकृति के साथ खिलवाड़ करना बंद करना होगा। लोगों के बीच इस तरह की जागरुकता को पैदा करने में आधी आबादी भी पीछे नही है। यानी की बहुत सी महिला एक्टीविस्ट हैं जिन्होंने पर्यावरण को बचाने के दिशा में कई प्रयास किए हैं। तो चलिए जानें उन महिलाओं के बारे में जो दुनियाभर के लोगों को पर्यावरण और प्रकृति को बचाने की मुहिम में आगे आईं हैं और लोगों को इस मुहिम से जुड़ने की प्रेरणा देती हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस 2020: इन पांच महिलाओं ने प्रकृति को बचाने की दिशा में किए सराहनीय प्रयास
इस कड़ी में सबसा पहला नाम जिस महिला का आया है वो 16 वर्षीय एक किशोरी है जिसने अपने प्रयासों से लोगों को पर्यावरण के प्रति अपने रवैये को सही करने के लिए सचेत किया। ग्रेटा थनबर्ग ने यूरोपियन पार्लियामेंट के सामने लाखों युवाओं के सामने अपनी बातों से प्रभावित किया। पर्यावरण और आने वाले भविष्य के प्रति चिंता जाहिर की और जलवायु परिवर्तन के प्रति लोगों को सचेत किया।
युगांडा की 70 प्रतिशत आबादी 30 साल से कम उम्र के लोगों की है। इस बढ़ती हुई आबादी के लिए हर दिन होने वाले जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को बचाने का मुद्दा काफी ज्वलंत है। ऐसे में एक्टिविस्ट नाकबाए हिल्डा ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण के खतरों के बारे में जागरूकता बढाने के लिए अभियान चलाया है। वो भविष्य के लिए युगांडा को दूषित पर्यावरण से बचाना चाहती हैं। वो प्लास्टिक को हटाने और सरकार से ग्रीन हाउस गैसों के कम उत्सर्जन के लिए आग्रह करती हैं।
जर्मन केवल ग्रेटा थनबर्ग के लिए ही नहीं बल्कि लुइस न्यूबॉयर के लिए भी जाना जाता है। 22 साल की ये एक्टीविस्ट जलवायु परिवर्तन को रोकने से संबंधित संगठनों के साथ मिल काम करती हैं। वो अपने ब्लॉग के जरिए लोगों को जागरूक करती हैं।
9 साल की रिद्धिमा इस उम्र से ही वो काम करती है जिस उम्र में सारे बच्चे खेलने जाते हैं। रिद्धिमा भारत सरकार के उन विफल प्रयासों को सही करने की कोशिश करती हैं जिसमें भारत ने जलवायु परिवर्तन की दिशा में काम करने के लिए कहा था। उनकी संस्था उन सरकारी गतिविधियों पर नजर रखती है जो अपने काम और उत्तरदायित्व को पूरा करने में असफल हो गए हैं। इसके साथ ही रिद्धिमा सरकार को ग्रीन हाउस गैसों के कम उत्सर्जन के लिए भी कहती हैं।

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