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Special Story: गुलाम भारत में इस महिला को मिला था मंत्री पद, आजादी की लड़ाई में कई बार जा चुकीं थीं जेल

Fri, 18 Aug 2023 12:41 PM IST
मेघा कुमारी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 18 Aug 2023 12:41 PM IST
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Vijaya Lakshmi Pandit birthday special story Vijaya Lakshmi Pandit vijaya lakshmi pandit role in freedom stru
विजयलक्ष्मी पंडित - फोटो : Amarujala

Vijaya Lakshmi Pandit Birthday special:भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में पुरुषों का बड़ा योगदान रहा है। साथ ही महिलाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है। उस दौर में जब महिलाएं पर्दे के पीछे रहा करती थी, तब कुछ महिलाओं ने अपनी जान की बाजी लगाकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी। इसमें जवाहर लाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। वे एक ऐसी स्वतंत्रता सेनानी थी, जो आजादी की इस लड़ाई में कई बार जेल जा चुकी थी। खास बात ये थी कि, वह जेल से आने के बाद फिर एक नए जज्बे से स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो जाती थी। विजयलक्ष्मी पंडित पहली महिला थी जिन्होंने भारतीय महिला शक्ति की समाज में एक नई पहचान बनाई थी। कई देशों की राजदूत और कुछ राज्यों के राज्यपाल होने के बाद भी वे अपनी ही भतीजी इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल का विरोध करने पर सुर्खियों में आई थी। साथ ही इस विरोध में उन्होंने कांग्रेस पार्टी तक को भी छोड़ दिया था। 

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इलाहाबाद में हुआ था जन्म

विजयलक्ष्मी पंडित का जन्म 18 अगस्त 1900 को इलाहाबाद में हुआ था। उनकी माता का नाम स्वरूप रानी नेहरू और पिता का नाम मोतीलाल नेहरू था। बात उनकी पढ़ाई की करें तो, वह उनके घर आनंद भवन से ही हुई है। इसके बाद विजयलक्ष्मी पंडित का 1921 में काठियावाड़ के सुप्रसिद्ध वकील रंजीत सीताराम पंडित से निकाह हुआ। शादी के बाद भी वह लगातार सुर्खियों में बनी रही। 

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राजनीति में विजय लक्ष्मी पंडित का सफर 

आजादी की जंग में खुद को समर्पित करने वाली विजयलक्ष्मी पंडित ने राजनीति क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई थी। 1935 में भारत सरकार अधिनियम लागू हुआ। इसके बाद 1937 में इस कानून के तहत कई प्रांतों में कांग्रेस की सरकार बनी, जिसमें विजय लक्ष्मी पंडित को उत्तर प्रदेश संयुक्त प्रांत का कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। खास बात ये है कि, अंग्रेजों के राज में विजयलक्ष्मी पंडित कैबिनेट पद पाने वाली पहली महिला थीं।  आपको बता दें, विजयलक्ष्मी की पहचान सिर्फ जवाहर लाल नेहरू की बहन के रूप में नहीं थी। बल्कि अपने संघर्षों से उन्होंने देश विदेश में अपनी पहचान बनाई थी।

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महिलाओं के अधिकारों के लिए किया संघर्ष

महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ने में विजयलक्ष्मी पंडित की अहम भूमिका रही। उन्होंने महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए कई संघर्ष किए। 1956 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम बनाने में उन्होंने काफी प्रयास किया था। इसी के बाद महिलाओं को अपने पति और पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार प्राप्त हो सका था। 1952 में चीन जाने वाले सद्भावना मिशन का नेतृत्व भी उन्होंने किया था। 

कई किताबें लिख चुकी हैं विजयलक्ष्मी पंडित

राजनीति के अलावा उन्होंने किताबें लिखने का भी काफी शौक था। इस दौरान उन्होंने कई किताबें भी लिखी है। जिसमें मुख्यत ‘द इवोल्यूशन ऑफ इंडिया’, ‘द स्कोप ऑफ हैप्पीनेस: ए पर्सनल मेमोयर’ और ‘प्रीज़न डेज़’ का नाम शामिल है। विजयलक्ष्मी पंडित भारतीय इतिहास का एक ऐसा नाम हैं जब जब महिलाओं के हक की बात होंगी उनका नाम सबसे पहले लिया जाएगा।

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