कौन कहता है कि महिलाएं कमजोर होती हैं। मैरी कोम, मीरा बाई चानू का नाम सुनते ही महिलाओं को कमजोर कहने वालों की आंखें खुल जानी चाहिए। महिलाएं न मानसिक और न ही शारीरिक तौर पर कमजोर होती हैं। बल्कि महिलाएं तो इतनी मजबूत और ताकतवर होती हैं कि अपनी बल शक्ति से देश का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन्हीं दमदार महिलाओं में एक नाम है जमुना बोरो का। जमुना बोरो भारतीय महिला मुक्केबाज हैं। वर्तमान में 54 किलोग्राम वर्ग में भारत की नम्बर वन मुक्केबाज विश्व रैंक में टॉप 5 में शामिल हैं। इतनी बड़ी उपलब्धि जमुना बोरो के नाम है लेकिन क्या आपको पता है कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जमुना बोरो को कितना संघर्ष करना पड़ा? उन्होंने एक ऐसा खेल चुना, जिसे लेकर उन्हें ये कह कर डराया जाता था कि मुक्के से अगर उनकी सूरत बिगड़ गयी तो शादी तक नहीं होगी। इन सब के बावजूद जमुना डरी नहीं बल्कि अपने सपने को पूरा करने के लिए लड़ी। मुक्के खाए भी और लगाए भी । रिश्तेदारों की बातें सुनी, दर्द सहा, कड़ी मेहनत की और बन गईं देश की सबसे बड़ी महिला बॉक्सर जमुना बोरो। आज हम आपको जमुना बोरो के बॉक्सर बनने की कहानी बताने जा रहे हैं।
Jamuna Boro: जानिए जमुना बोरो के बॉक्सर बनने तक का सफर, कभी शादी न होने की बात से डराते थे रिश्तेदार
कौन है जमुना बोरो
जमुना बोरो वर्ल्ड टॉप 5 और महिलाओं की 54 किलोग्राम वर्ग में देश की नंबर एक मुक्केबाज हैं। उन्होंने भारत के लिए मुक्केबाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। ताइपे में विश्व युवा मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में कांस्य पदक, 56वें बेलग्रेड इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 54 किलो वर्ग श्रेणी में रजत पदक उनके नाम है।
जमुना बोरो का बचपन और परिवार
उनका जन्म असम के छोटे से कस्बे ढेकियाजुली के पास बेलसिरी गाँव में हुआ था। जब बोरो बच्ची थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया था। मां बच्चों के पालन पोषण के लिए अकेले खेती करती और चाय व सब्जियां बेचा करती थीं।
कैसे बॉक्सिंग में रखा कदम
स्कूल के दिनों में एक बार जमुना ने कुछ युवाओं को वुशु नाम का खेल खेलते देखा। जमुना को उत्सुकता हुई और उन्होंने भी इस खेल में हाथ आजमाने की सोची। यहीं से उनका पहला कदम बॉक्सिंग की दिशा में बढ़ा। कुछ समय बाद बोरो ने महसूस किया की मुक्केबाजी में स्कोप है तो उन्होंने इसे ही प्रोफेशन बनाने की ठानी और प्रैक्टिस शुरू कर दी।
मुक्केबाज बनने में बोरो के सामने आईं ये परेशानियां
बोरो के लिए अपने सपने को पूरा करना आसान नहीं था। वह एक ऐसे क्षेत्र से हैं, जहां संसाधनों की कमी थी। कोई मार्ग दर्शन करने वाला नहीं था। इन सब से तो बोरो ने सामना किया ही लेकिन रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने भी बोरो को इस खेल से दूर रहने की सलाह दी। बोरो से कहा जाता कि ये खेल महिलाओं के लिए नहीं है। उन्हें ये तर्क दिया गया कि एक चोट से पूरा चेहरा बिगड़ जाएगा। फिर शादी होने में दिक्कत आएगी। हालांकि बोरो के परिवार ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया और उनके फैसले का समर्थन करते हुए बोरो को प्रैक्टिस के लिए प्रेरित किया।

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