Ram Mandir Pran Pratishtha: रामलला अब राम मंदिर में विराजित हो चुके हैं। भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान के रूप में सम्मलित हुए। प्रधानमंत्री मोदी प्राण प्रतिष्ठा के दौरान चांदी का एक विशेष थाल लेकर पहुंचे। थाल में लाल रंग का वस्त्र और चांदी का छत्र भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चढ़ाए गए वस्त्र, छत्र और कमल के फूल का धार्मिक महत्व क्या है और देवताओं के पूजन में इसकी क्या मान्यता है। आइए जानते हैं।
Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रधानमंत्री ने भेंट की ये वस्तुएं , जानें इसका महत्व
चांदी के छत्र का धार्मिक महत्व
किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में देवताओं के श्रृंगार के स्वरूप चांदी का छत्र भेंट स्वरूप दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चांदी का छत्र सत्ता का सूचक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री हरि विष्णु को क्षीरसागर में शयन करते हुए दर्शाया गया है। भगवान विष्णु के सिर के ऊपर शेष नाग छत्र के रूप में रहते हैं। इसलिए भगवान राम के हर मंदिर में उनके विग्रह के ऊपर लगा छत्र उनकी महिमा को दर्शाता है।
कमल के फूल का महत्व
पीएम नरेंद्र मोदी ने हाथ में कमल का फूल लेकर उन्होंने अनुष्ठान विधियों को आरंभ किया। अनेक प्रकार के यज्ञों व अनुष्ठानों में भी कमल के पुष्पों को निश्चित संख्या में चढ़ाने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कमल के फूल की उत्पत्ति सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु की नाभि से हुई है। यही वजह है कि कमल का पुष्प मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को अति प्रिय है। भगवान राम विष्णु जी के अवतार मानें जाते हैं, इसलिए श्रीराम की पूजा में भी कमल के फूल का विशेष महत्व माना जाता है।
वस्त्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्र के साथ वस्त्र भी लेकर आए थे। वस्त्र का रंग लाल था। लाल रंग को सौभाग्य का रंग माना जाता है। लाल रंग के कपड़े का उपयोग हर शुभ काम में होता है। ऐसे में पूजा के दौरान अगर लाल रंग का कपड़ा बिछाया जाए तो इससे सोया हुआ भाग्य भी जाग जाता है।
कुशा का महत्व
प्रधानमंत्री ने पूजा के दौरान कुशा धारण की थी। पूजा पाठ में कुशा का भी विशेष महत्व है। कुशा एक पवित्र घास हैं जिससे नकारात्मकता दूर होती है। कहते हैं कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। मत्स्य पुराण के अनुसार एक बार जब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया और धरती बनाई तब उन्होंने अपने शरीर पर से पानी को झाड़ा इस दौरान उनके शरीर से बाल धरती पर गिरे और कुशा के रूप में बदल गए। कुशा की अंगूठी बनाकर तीसरी उंगली यानी अनामिका उंगली में पहनी जाती है जिसे पवित्री के नाम से भी जाना जाता है। इसके उपयोग से मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से पवित्रता हो जाती है इसलिए इसे पूजा-पाठ में हर जगह उपयोग किया जाता है। पूजा-पाठ के दौरान जगह पवित्र करने के लिए भी कुशा से जल छिड़का जाता है।