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गुजरात में ये तीन युवा नेता थे कांग्रेस की उम्मीद, लेकिन बड़े झटकों ने बिगाड़ दिया खेल
Fri, 12 Apr 2019 06:05 PM IST
अमित मंडल
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Fri, 12 Apr 2019 06:05 PM IST
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लोकसभा चुनाव 2019
- फोटो : PTI
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लोकसभा चुनाव 2019 में इस बार सभी की निगाहें गुजरात पर भी लगी हुई हैं। पीएम नरेंद्र मोदी का गृहनगर होने के कारण हर किसी की नजर भाजपा के प्रदर्शन पर है। 2014 चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल करते हुए सभी 25 सीटों पर कब्जा जमाया था। कांग्रेस एक बार फिर भाजपा का किला भेदने में नाकाम रही। इस बार भाजपा के लिए यह करिश्मा दोहराने की चुनौती होगी।
अल्पेश ठाकोर
अल्पेश ठाकोर
सबसे बड़ा झटका दिया अल्पेश ठाकोर ने जिन्होंने कांग्रेस ही छोड़ दी। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने पार्टी को अलविदा कह दिया। उनके साथ दो और विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी। इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब तक वह जोर शोर से कांग्रेस के लिए प्रचार में लगे थे और भाजपा को लगातार घेर रहे थे। उनके भाजपा में शामिल होने की खबरें भी उड़ीं जिसे उन्होंने खारिज कर दिया।
हार्दिक पटेल (फाइल फोटो)
हार्दिक पटेल
पाटीदार आंदोलन के सबसे बड़े नेता युवा हार्दिक पटेल आरक्षण को लेकर लंबे समय से भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। विधानसभा चुनाव के समय से ही वह कांग्रेस का समर्थन कर रहे थे। उन्होंने भाजपा के खिलाफ जमकर प्रचार किया था। मार्च 2019 को वह कांग्रेस में भी शामिल हो गए और जामनगर से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। लेकिन गुजरात हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उन्हें तगड़ा झटका मिला। गुजरात उच्च न्यायालय ने 2015 के मेहसाणा दंगा मामले में हार्दिक को मिली दो साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इस वजह से वह जनप्रतिनिधि 1951 के प्रावधानों के अंतर्गत आ गए हैं। इसके तहत दो साल या अधिक वर्षों की जेल की सजा काट रहा व्यक्ति दोषसिद्धि पर रोक लगने तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इस तरह वह कांग्रेस के लिए उतने फायदेमंद नहीं रह गए जितना चुनाव लड़ने की सूरत में हो सकते थे। अदालत का फैसला कांग्रेस के लिए भी एक झटका साबित हुआ।
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जिग्नेश मेवानी
- फोटो : twitter
जिग्नेश मेवाणी
2017 विधानसभा चुनाव में जिग्नेश मेवाणी ने वडनगर से चुनाव जीता था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ही जिग्नेश को वडनगर सीट ऑफर की थी और वह निर्दलीय जीते। इसके बाद हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में उन्होंने खुलकर भाजपा का विरोध किया। पूरे देश घूमकर भाजपा विरोध का झंडा बुलंद करते हुए दूसरे दलों के उम्मीदवारों का प्रचार किया। इन दिनों वह बेगूसराय में कन्हैया कुमार के प्रचार में जुटे हुए हैं। इससे पहले उन्होंने कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव प्रचार किया। साफ नजर आता है कि वह राष्ट्रीय परिदृश्य में बड़े दलित नेता के तौर पर उभरना चाहते हैं। गुजरात की राजनीति में उनकी बहुत ज्यादा दिलचस्पी नजर नहीं आती है। एक तरह से वह खुद को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या वह गुजरात में कांग्रेस के लिए समर्थन जुटाएंगे।
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और हार्दिक पटेल
- फोटो : PTI