तस्वीरें: ये अल्पसंख्यक बन सकते है ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ?
साज़िद जावेद-साज़िद जावेद ब्रिटेन के मंत्रिमंडल में बिज़नेस सेक्रेटरी हैं। पिछले साल नवंबर में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि उनकी यह ख़्वाहिश है कि एक नस्ली अल्पसंख्यक ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनकर यह साबित करे कि यहां हर पृष्ठभूमि के नागरिक ऐसी सफलता हासिल कर सकते हैं। हालांकि वक़्त ही बताएगा कि उनकी इच्छा पूरी होगी या नहीं। ब्रिटेन में केवल गिने-चुने अश्वेत कैबिनेट मंत्री ही हैं। मई में चुनाव में मिली जीत के बाद कैमरन की नई कैबिनेट में महज दो नस्ली अल्पसंख्यक कैबिनेट मंत्री हैं।
रिपोर्ट-जावेद इक़बाल/एनालिसिस ऐंड इनसाइट एडिटर
तस्वीरें: ये अल्पसंख्यक बन सकते है ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ?
लेबर पार्टी की बात करें तो सूका उमन्ना को कई लोग नए लेबर नेता के प्रमुख उम्मीदवार के तौर पर देखते थे जब तक कि वे इस दौड़ से बाहर नहीं हो गए। चुक उमन्ना को लेबर पार्टी के नेता के तौर पर पेश किया गया।
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वेस्टमिंस्टर के बड़े और प्रभावशाली नेताओं में सादिक़ ख़ान एक दूसरी मिसाल हैं जो लंदन मेयर के उम्मीदवार हो सकते हैं। संसद की निचली सदन में अश्वेत सांसदों की तादाद बढ़ी है और नए संसद में इनकी हिस्सेदारी क़रीब 6 फ़ीसदी तक है। वर्ष 2010 में इनकी तादाद 4 फ़ीसदी थी। आलोचकों का कहना है कि यह रुझान उत्साहजनक है लेकिन अगर संसद को वास्तव में पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व करना है तो ये उसके के लिए पर्याप्त नहीं है।
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भारतीय मूल की प्रीति पटेल ब्रिटेन सरकार में उभरती सितारा हैं। कुछ लोग कंजरवेटिव पार्टी के सांसद साज़िद जाविद को भविष्य के नेता के तौर पर देखते हैं हालांकि उनके राजनीति विचार उनके नस्ली मुद्दे से ज़्यादा अहम हैं। यह भी नज़रिए में बदलाव का एक दूसरा संकेत है। प्रीति पटेल पिछले महीने भारतीय मूल की पहली महिला मंत्री बनीं। वेस्टमिंस्टर के दक्षिणपंथी विचारधारा वाले चंद अल्पसंख्यक नस्ली नेताओं में जाविद और पटेल रहे हैं। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अब पटेल अपने नस्ली मुद्दों से ज़्यादा कल्याणकारी सुधारों पर ज़ोर देती हैं।
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पॉल बोटें- ब्रिटेन में पहले अल्पसंख्यक सांसद बने। वर्ष 1987 में लेबर पार्टी के चार अश्वेत और अल्पसंख्यक सांसद संसद में जीतकर आए थे। पॉल बोटेंग मंत्री के तौर पर काफ़ी सफल रहे हैं और अक्सर उनके पहले अश्वेत कैबिनेट मंत्री होनी की बात कही जाती है। कुछ लोगों ने यह अटकलें भी लगाई थीं कि वे शीर्ष स्तर तक जा सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और अब वह संसद के ऊपरी सदन के सदस्य हैं।