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दूसरे विश्व युद्ध के दुर्लभ हथियार और टैंक, देखें तस्वीरें
Thu, 24 Dec 2015 06:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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Updated Thu, 24 Dec 2015 06:58 PM IST
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आज देशों की रक्षा प्रणाली आधुनिकता का चरम बिंदु खोज रही है। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ये कार-टैंक ही सबसे आधुनिक कहे जाते थे। दिलचस्प तस्वीरें।
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सितंबर 1939 से सितंबर 1945 तक यानी करीब 6 साल चले द्वितीय विश्व युद्ध की खौफनाक तस्वीरें आज तक जेहन को झकझोरती हैं। तब बेशक आज के मुकाबले ताकतवर और उच्च मारक क्षमता वाले हथियार और आधुनिक वाहन नहीं थे, लेकिन जो भी थे उनके इस्तेमाल से लड़ाईयां जीती गईं। उन्हीं में से एक थी बख्तरबंद राइनो हैवी कार। ऑस्ट्रेलिया में तैयार की गई राइनो में 30 एमएम की गन लगी थी। इसे क्रूसेडर टैंक भी कहा गया।
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इस बख्तरबंद कार को 'फॉक्स' कहा जाता था। कनाडा के जनरल मोटर्स ने इसे ब्रिटेन की बख्तरबंद लड़ाकू कार हल की तर्ज पर बनाया था। इस कार में एक साथ चार लोग सवार हो सकते थे। जिनमें ड्राइवर समेत कमांडर, गनर, वायरलैस ऑपरेटर शामिल हैं। इस तरह की 1506 कारें बनाई गई थीं।
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ये रही ब्रिटेन की हंबर एलआरके एमके थर्डए कार। ये गोला-बारूद और असलहों से लैस एक हल्की टोही कार थी। खास बात ये है कि इसमें 19 रेडियो सेट इस्तेमाल में लाए जा सकते थे। 1940 से 1943 के बीच ऐसी करीब 3 हजार 600 सौ कारें बनाई गईं।
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कनेडियन जीएम मार्क वन। जैसा कि नाम से ही जाहिर है इस कार को कनाडा ने ही तैयार किया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कनाडा ने इसे ब्रिटेन और राष्ट्रमंडल के लिए तैयार किया। तमाम असलहा-बारूद से लैस इस टोही कार का इंजन हंबर से ज्यादा ताकतवर था। लेकिन समग्र प्रदर्शन में ये कार हंबर से पीछे रही।
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