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रिसर्च में फिसड्डी क्यों है भारत?

Tue, 12 Jan 2016 02:53 PM IST
टीम इंडियास्पेंड/ बीबीसी
टीम इंडियास्पेंड/ बीबीसी Updated Tue, 12 Jan 2016 02:53 PM IST
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रिसर्च में फिसड्डी क्यों है भारत?

Why India remains second in doing research?

बीते 10 साल में भारत में दिए गए हर छह पेटेंट में से सिर्फ एक की खोज भारतीयों ने की थी। इंडियास्पेंड ने अपने विश्लेषण में ये पाया कि बाकी के पांच पेटेंट देश में काम कर रही विदेशी कंपनियों को मिले, जो अपनी बौद्धिक संपदा की रक्षा करना चाहती थीं। दूसरे अध्ययनों से भी पता चला है कि नई चीजों को खोजने या नई तकनीक विकसित करने मे भारत निहायत ही कमजोर है।(टीम इंडियास्पेंड/ बीबीसी)


रिसर्च में फिसड्डी क्यों है भारत?

Why India remains second in doing research?

चार नोबेल पुरस्कार विजेताओं का कहना है कि ये भारत की पारंपरिक कमजोरी है और इसे ठीक करना बेहद जरूरी है। इन नोबेल विजेताओं का कहना है कि भारत को मैनुफैक्चरिंग का केंद्र बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना 'मेक इन इंडिया' से पहले यह जरूरी है कि कंपनियां भारत में नई चीजें खोजें।

रिसर्च में फिसड्डी क्यों है भारत?

Why India remains second in doing research?

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) ने साल 2015 में जो ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स जारी किया उसमें भारत 81वें स्थान पर है।

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Why India remains second in doing research?

भारत में बहुत ज्यादा खोज नहीं हो रही, जो थोड़ी बहुत खोज हो रही है, उसमें सबसे आगे केंद्र सरकार की संस्था काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) है। इसने 10 साल में कुल 10,564 में से 2,060 पेटेंट हासिल किए हैं। इसके बाद सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियां हैं।

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रिसर्च में फिसड्डी क्यों है भारत?

Why India remains second in doing research?

भारत में बीते दस साल में सबसे ज्यादा पेटेंट रसायन के क्षेत्र में शोध के लिए मिले हैं। लेकिन आगे की खोजों के लिए सरकार क्या कर रही है? सरकार का इरादा जल्द ही राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति की घोषणा करने का है।

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