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धधक रहे हैं 140 गांवों के घर

Sun, 31 Aug 2014 01:33 PM IST
Updated Sun, 31 Aug 2014 01:33 PM IST
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धधक रहे हैं 140 गांवों के घर

there is a siuation like catastrophe in some villages of bengal.

साल 2009 में आसनसोल की एक सड़क पर अचानक दरार पड़ गई और जमीन धंसने लगी थी। तब इसकी चपेट में एक बस आ गई थी और हादसा हो गया था।(फाइल चित्र)

धधक रहे हैं 140 गांवों के घर

there is a siuation like catastrophe in some villages of bengal.

पश्चिम बंगाल में वर्धमान ज‌िले के रानीगंज इलाके में सरकारी कोयला खानों में कई साल से आग धधक रही है।(सभी तस्वीरें: त्रिरंजन चटर्जी)

धधक रहे हैं 140 गांवों के घर

there is a siuation like catastrophe in some villages of bengal.

कोयला निकालने के बाद खदानों को बालू और पानी से भरना जरूरी होता है। ऐसा न होने से मीथेन गैस भर जाती है। इनमें बालू न भरे जाने के वहां आग फैल गई।

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धधक रहे हैं 140 गांवों के घर

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इलाके के कई गांव इसकी चपेट में हैं। पहले तो जमीन में दरार आती है, फिर काला धुआं दिखाई देता है और आग धधकने लगती है। अवैध खदान उद्योग को बल मिला और यूं ही छोड़ दी गई खदानें आग का घर बन गईं।

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खेत खलिहानों और घरों में भी दरारें हैं। ईस्टर्न कोलफ़ील्ड लिमिटेड की इन खदानों में आग लगने पर सरकार की ओर से मशीनें भेजी जाती हैं, पर समस्या से निपटने के लिए कुछ नहीं किया जाता।

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