सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक
सियाचिन को दुनिया का सबसे ऊंचा और दुगर्म रणक्षेत्र माना जाता है। जहां सैनिकों को शून्य से 40 डिग्री नीचे के तापमान में भी मुस्तैद रहकर सरहद की निगेहबानी करनी पड़ती है।
सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक
दुर्गम हालात और सीमित संसाधनों के बीच हमारे जवान पिछले तीस सालों से यहां लगातार सीमा की रखवाली में जुटे हैं। यहां जीवन किस कदर मुश्किल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जवानों के अलावा यहां दूर दूर तक न पेड़ पौधे दिखते हैं और न कोई जानवर। इंसानी बस्ती की तो कल्पना करना ही मुश्किल है। दूर दूर तक केवल बर्फ ही दिखाई देती है।
सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक
बर्फ भरे तूफान और डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाली आंधियां यहां हर समय जवानों के जीवट की परीक्षा लेती रहती हैं। प्राकृतिक आपदाओं के कारण ही 1986 से अब तक हमारे साढ़े आठ सौ से ज्यादा जवान मौत के मुंह में समा चुके हैं।
सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक
सियाचिन ग्लेशियर जमीन से 6700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस 76 किलोमीटर लंबे ग्लेशियर को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर माना जाता है। इसलिए यहां सिवाय बर्फ के कुछ और दिखना मुश्किल है। इसी बर्फ में हर समय डटे रहते हैं हमारे जवान।
सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक
दिन के समय यहां का तापमान औसतन शून्य से 30-40 डिग्री नीचे और रात के समय 70 डिग्री नीचे तक चला जाता है। कल्पना कीजिए इन हालात में हमारे जवान कैसे हर समय मोर्चे पर डटे रहते हैं।