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सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक

Sat, 06 Feb 2016 08:49 PM IST
Updated Sat, 06 Feb 2016 08:49 PM IST
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सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक

Siachen: Difficulties of soldiers who posted in siachen border

सियाचिन को दुनिया का सबसे ऊंचा और दुगर्म रणक्षेत्र माना जाता है। जहां सैनिकों को शून्य से 40 डिग्री नीचे के तापमान में भी मुस्तैद रहकर सरहद की निगेहबानी करनी पड़ती है।


सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक

Siachen: Difficulties of soldiers who posted in siachen border

दुर्गम हालात और सीमित संसाधनों के बीच हमारे जवान पिछले तीस सालों से यहां लगातार सीमा की रखवाली में जुटे हैं। यहां जीवन किस कदर मुश्किल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जवानों के अलावा यहां दूर दूर तक न पेड़ पौधे दिखते हैं और न कोई जानवर। इंसानी बस्ती की तो कल्पना करना ही मुश्किल है। दूर दूर तक केवल बर्फ ही दिखाई देती है।

सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक

Siachen: Difficulties of soldiers who posted in siachen border

बर्फ भरे तूफान और डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाली आंधियां यहां हर समय जवानों के जीवट की परीक्षा लेती रहती हैं। प्राकृतिक आपदाओं के कारण ही 1986 से अब तक हमारे साढ़े आठ सौ से ज्यादा जवान मौत के मुंह में समा चुके हैं।

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सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक

Siachen: Difficulties of soldiers who posted in siachen border

सियाचिन ग्लेशियर जमीन से 6700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस 76 किलोमीटर लंबे ग्लेशियर को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर माना जाता है। इसलिए यहां सिवाय बर्फ के कुछ और दिखना मुश्किल है। इसी बर्फ में हर समय डटे रहते हैं हमारे जवान।

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सियाचिन: -40 डिग्री तापमान में क्या-क्या सहते हैं सैनिक

Siachen: Difficulties of soldiers who posted in siachen border

दिन के समय यहां का तापमान औसतन शून्य से 30-40 ‌डिग्री नीचे और रात के समय 70 डिग्री नीचे तक चला जाता है। कल्पना कीजिए इन हालात में हमारे जवान कैसे हर समय मोर्चे पर डटे रहते हैं।

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