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देखिए, 1987 में हुए बहुचर्चित हाशिमपुरा कांड की दुर्लभ तस्वीरें
Sun, 22 Mar 2015 08:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 22 Mar 2015 08:24 AM IST
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फरवरी 1986 में केंद्र सरकार ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने का आदेश दिया, तो वेस्ट यूपी में माहौल गरमा गया था। इसके बाद 14 अप्रैल 1987 से मेरठ में धार्मिक उन्माद शुरू हुआ। कई लोगों की हत्या हुई, तो दुकानों और घरों को आग के हवाले कर दिया गया था।
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हत्या, आगजनी और लूट की वारदातें होने लगीं। इसके बाद भी मेरठ में दंगे की चिंगारी शांत नहीं हुई थी। मई का महीना आते-आते कई बार शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हुए और कर्फ्यू लगाना भी पड़ा।
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जब माहौल शांत नहीं हुआ और दंगाई लगातार वारदात करते रहे, तो शहर को सेना के हवाले कर दिया गया था। इसके साथ ही बलवाइयों को काबू करने के लिए 19 और 20 मई को पुलिस, पीएसी तथा सेना के जवानों ने सर्च अभियान चलाया था।
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हाशिमपुरा के अलावा शाहपीर गेट, गोला कुआं, इम्लियान सहित अन्य मोहल्लों में पहुंचकर सेना ने मकानों की तलाशी लीं। इस दौरान भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री मिली थीं। सर्च अभियान के दौरान हजारों लोगों को पकड़ा गया और गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। इसी दौरान 22 मई की रात हाशिमपुरा कांड हुआ।
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हापुड़ रोड पर गुलमर्ग सिनेमा के सामने हाशिमपुरा मोहल्ले में 22 मई 1987 को पुलिस, पीएसी और मिलिट्री ने तलाशी अभियान चलाया था। आरोप के अनुसार यहां से किशोर, युवक और बुजुर्गों सहित कई सौ लोगों को ट्रकों में भरकर पुलिस लाइन्स ले जाया गया। एक ट्रक को दिन छिपते ही पीएसी के जवान मुरादनगर गंग नहर ले गए। उस ट्रक में करीब 50 लोग थे। वहां ट्रक से उतारकर लोगों को गोली मारी गई और फिर उन्हें गंग नहर में फेंक दिया गया।
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