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खुलासा: अंडे अब पहले जैसी ताकत देने वाले नहीं रहे

Fri, 27 Nov 2015 03:18 AM IST
Updated Fri, 27 Nov 2015 03:18 AM IST
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खुलासा: अंडे अब पहले जैसी ताकत देने वाले नहीं रहे

now the eggs are not as strength as before.

सर्दी के इस मौसम में संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे का स्लोगन भले लुभाता है लेकिन अब अंडों की ताकत कम होती जा रही है। दरअसल, इसकी वजह मुर्गियों को दी जाने वाली खुराक में कैल्शियम की कमी है। कैल्शियम की कमी से अंडे की बाहरी शेल (परत) कमजोर हो रही है। इसके चलते हल्की सी चोट पर अंडा दो भागों में टूट जाता है। (शालिनी बाजपेयी/अमर उजाला, बरेली)


खुलासा: अंडे अब पहले जैसी ताकत देने वाले नहीं रहे

now the eggs are not as strength as before.

केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के न्यूट्रीशियन एंड फीड टेक्नोलॉजी डिवीजन के विभागाध्यक्ष व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एबी मंडल के अनुसार मुर्गी को आहार में 3.8 से 4.2 ग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है लेकिन पालक इसका पालन नहीं करते। नतीजा, अंडे की बाहरी शेल कमजोर हो जाती है। कई बार पिंपल्स जैसे उभार आ जाते हैं। अंडा जल्दी खराब भी हो जाता है।

खुलासा: अंडे अब पहले जैसी ताकत देने वाले नहीं रहे

now the eggs are not as strength as before.

मुर्गी के अंडे में कार्बोहाइड्रेड, फैट, विटामिन, प्रोटीन और मिनरल होते हैं। मिनरल में कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, जिंक खासतौर पर होते हैं। अंडे की बाहरी शेल में दो से तीन ग्राम कैल्शियम और अंदर जर्दी में एक ग्राम कैल्शियम होता है।

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now the eggs are not as strength as before.

कैल्शियम कम खिलाएंगे तो जर्दी में भी कैल्शियम कम हो जाएगी। जो लोग कैल्शियम पाने के लिए अंडा खाएंगे, उन्हें इसका पूरा फायदा नहीं मिलेगा। कैल्शियम के लिए जरूरी है कि मुर्गी को 3.8-4.2 ग्राम कैल्शियम दिया जाए। अर्ली एज की मुर्गी का अंडा छोटा होता है और ओल्ड एज की मुर्गी का अंडा बड़ा होता है। अंडा बड़ा होने पर उसमें पोषक तत्व भी बढ़ जाते हैं।

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16 सप्ताह में अंडा देना शुरू करने वाली मुर्गी आमतौर पर एक साल में 325 से 330 अंडे देती हैं। इसके लिए मुर्गी को प्रोटीन, ऊर्जा, अमीनो एसिड, जरूरी फैटी एसिड, कैल्शियम, फास्फोरस, शुष्क खनिज, बाजारा, चावल का चोकर, टूटा हुए चावल, चावल का चूरा, मारबल पत्थर का पाउडर, मारबल के छोटे टुकड़े, डाई कैल्शियम फास्फेट, विटामिन, खनिज लवण आदि को मिलाकर तैयार किया गया आहार दिया जाना चाहिए। उपलब्ध होने पर मक्का, और सोयाबीन आदि भी दिया जा सकता है।

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