सपने अधूरा छोड़ गए रवींद्र जैन, जानें क्या था उनका सपना
संगीत के सुरों में अध्यात्म का अहसास पिरोने वाले प्रसिद्ध संगीतकार रविंद्र जैन का शुक्रवार को मुंबई में बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। उनके निधन का समाचार सुनकर मुंबई से अलीगढ़ तक शोक की लहर दौड़ गई। अलीगढ़ में कनवरी गंज में रह रहे उनके परिजन मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। (ब्यूरो/अमर उजाला,अलीगढ़)
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रविंद्र जैन के परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती दिव्या जैन और बेटा आयुष्मान जैन है, जो कि मुंबई में ही कक्षा 12 में पढ़ रहा है। सात भाई और एक बहन में रविंद्र जैन चौथे नंबर के थे। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें इसी वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
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28 फरवरी 1944 को कनवरी गंज के मशहूर वैद्य इंद्रमणि जैन और श्रीमती किरन जैन के यहां रविंद्र जैन का जन्म हुआ था। वह भले ही दिन के उजाले को नहीं देख सकते थे लेकिन बचपन से ही वह संगीत की अलौकिक लौ को पहचान गए थे। बचपन में रविंद्र जैन प्रसिद्ध जैन संत ध्यानांत्रजी और बुधजैन जी के भजन गाया करते थे।
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इसको देखते हुए परिजनों ने उनको संगीत की विधिवत शिक्षा दिलवाने का इंतजाम किया। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने पंडित जीएल जैन और पंडित जनार्धन शर्मा से हासिल की। फिल्मों में रविंद्र जैन का सफर 1960 में कोलकाता से शुरू हुआ। इसके 10 साल बाद प्रतिभूषण भट्टाचार्य उन्हें मुंबई ले आए और अपनी फिल्म क्रांति और बलिदान में बतौर संगीतकार मौका दिया।
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फिल्म चितचोर के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्ट का फिल्म फेयर अवार्ड भी दिया गया। चोर मचाए शोर (1974), गीत गाता चल (1975), चितचोर (1976), अखियों के झरोखों से (1978), राम तेरी गंगा मैली (1986), दो जासूस, हिना आदि उनकी प्रसिद्ध फिल्में हैं जिनके संगीत ने धूम मचाई।