हमारी इस ताकतवर मिसाइल के सामने अमेरिका-चीन भी फिसड्डी
भारत की इस मिसाइल का दुनिया भर में कोई जबाव नहीं है। अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फिसड्डी साबित होती है।
हमारी इस ताकतवर मिसाइल के सामने अमेरिका-चीन भी फिसड्डी
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का बीते रविवार को भारतीय नौसेना के सबसे नए स्टील्थ विनाशक जहाज आईएनएस कोच्चि से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। अरब सागर में सेवामुक्त किया जा चुका एक जहाज इसका लक्ष्य बना, जिसे इसने सफलतापूर्वक भेद दिया। आगे पढ़े इस मिसाइल से जुड़ी तमाम जानकारियां।
हमारी इस ताकतवर मिसाइल के सामने अमेरिका-चीन भी फिसड्डी
मिसाइल तकनीक में दुनिया की कोई भी मिसाइल तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकती। इसकी खूबियां इसे दुनिया की सबसे तेज मारक मिसाइल बनाती हैं। यहां तक की अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फिसड्डी साबित होती है। ब्रह्मोस टॉम हॉक से लगभग दोगुनी तेजी से हमला कर सकती है, इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से ज्यादा है।
हमारी इस ताकतवर मिसाइल के सामने अमेरिका-चीन भी फिसड्डी
ब्रह्मोस एक सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। क्रूज मिसाइल उसे कहते हैं जो कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडार की आंख से बच जाती है। ब्रह्मोस की खास बात ये है कि इसे जमीन से, हवा से, पनडुब्बी से, युद्धपोत से यानी कि कहीं से भी दागा जा सकता है। यही नहीं इस मिसाइल को पारंपरिक प्रक्षेपक के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता है।
हमारी इस ताकतवर मिसाइल के सामने अमेरिका-चीन भी फिसड्डी
ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है।