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विदेशों में संघ ने कैसे किया विस्तार, पढ़िए रोचक तथ्य
Mon, 11 Jan 2016 05:41 PM IST
Updated Mon, 11 Jan 2016 05:41 PM IST
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विदेशों में संघ ने कैसे किया विस्तार, पढ़िए रोचक तथ्य
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केंद्र में बीजेपी सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रोजाना ही चर्चा में रहता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयानों के बाद संघ की जिस एक कारण से सर्वाधिक चर्चा होती है, वह है उसकी सांगठिक क्षमता। 90 वर्षों से ये देश में कार्य कर रहा है और तकरीबन 50 से 60 लाख लोग इससे जुड़े हुए हैं। हिंदुत्व की विचारधारा के प्रचार-प्रसार इसका मकसद है। संगठन में हिंदुओं की संख्या अधिक है, हालांकि पिछले कुछ सालों में मुस्लिम और आदिवासी भी इससे जुड़े हैं। भारत के अतिरिक्त संघ ने 40 देशों में अपना विस्तार किया है। विदेशों में ये संगठन कैसे काम करता हैं, आइए जानें-
विदेशों में संघ ने कैसे किया विस्तार, पढ़िए रोचक तथ्य
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विदेशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ के रूप में कार्य करता है। ये संगठन 40 देशों में पंजीकृत है। तीन और देशों में भी इसकी शाखाएं हैं, हालांकि ये वहां पंजीकृत नहीं है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुस्तान में पंजीकृत संगठन नहीं है। रोचक बात है कि एचएसएस की पहली शाखा पानी के जहाज पर लगी थे और वो भी भारत की आजादी से चंद महीने पहले।
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जनवरी, 1947 में भारतीयों को लेकर अफ्रीका जा रहे एक जहाज पर पंजाब के संघ के एक सदस्य की इच्छा अपने संगठन की प्रार्थना गाने की हुई। उसने संघ की मशहूर प्रार्थना, 'नमस्ते सदावत्सले मातृभूमे' गाना शुरु किया तो उसने देखा की कई और लोग भी उसके साथ गा रहे हैं। संघ के उस कार्यकर्ता का नाम जगदीश शारदा शास्त्री था। जहाज पर लगी उस शाखा का संघ की भारत के बाहर लगी पहली शाखा माना गया।
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जहाज पर लगी संघ की पहली शाखा की इस कहानी का एक और 'वर्जन' भी है। उस कहानी के मुताबिक, 1946 में दो स्वयंसेवक मानेकभाई रुगानी और जगदीश चंद्र शारदा मुंबई से मोंबासा (कीनिया) जा रहा थे। वे दोनों एक दूसरे को जानते नहीं थे। लेकिन उन्हीं में से एक ने दूसरे का दाहिने हाथ से संघ की विशेष शैली में 'नमस्कार' करते देखा और उसके बाद दोनों ने एक दूसरे से परिचय किया। उन्होंने उसी जहाज पर पहली शाखा लगाई।
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उसी वर्ष भारत स्वयंसेवक संघ का कीनिया में गठन किया गया और बाद में उसे हिंदू स्वयंसेवक संघ नाम दिया गया। विदेशी धरती पर संघ की पहली शाखा मोंबासा में लगी थी। संघ की इसी इकाई सदस्यों ने तंजानिया, उगांडा, मॉरिशस और अफ्रीका के अन्य हिस्सों में अपना प्रचार-प्रसार किया। भारत स्वयंसेवक संघ कोई भारतीय स्वयंसेवक संघ भी कहा जाता रहा है।
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