शरीर में घुल गया ‘जिंदगी का जहर’, पढ़िए जुल्म की दास्तां
डॉक्टर शालिनी आर्य जिंदगी में न सिर्फ कामयाब बनना चाहती थी, बल्कि अपने मरीज को लेकर बेहद संवेदनशील भी थीं। पढ़ाई का जुनून ऐसा था कि शादी होने के बाद भी एमडी मेडिसिन की पढ़ाई पूरी की और गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। (विनीत त्रिपाठी/मेरठ)
शरीर में घुल गया ‘जिंदगी का जहर’, पढ़िए जुल्म की दास्तां
उन्होंने जिंदगी में हर मुसीबत का डटकर सामना किया था। पति और सास की प्रताड़ना को झेलती रहीं, लेकिन कभी अपने माता-पिता से जिक्र तक नहीं किया। 13 साल तक वह घुट-घुट कर जीती। आखिरकार मंगलवार को उन्हें ‘जिंदगी के जहर’ ने अपने आगोश में ले लिया।
शरीर में घुल गया ‘जिंदगी का जहर’, पढ़िए जुल्म की दास्तां
डॉ. शालिनी आर्य बचपन से ही पढ़ने में तेज थीं। वह एक कामयाब डॉक्टर बनना चाहती थीं। शालिनी की छोटी बहन शिल्पी गुप्ता ने बताया कि उन्होंने 12वीं तक की अपनी पूरी पढ़ाई दुर्गा बाड़ी सदर इंटर स्कूल से की। हमेशा स्कूल में टॉपर रहीं।
शरीर में घुल गया ‘जिंदगी का जहर’, पढ़िए जुल्म की दास्तां
वर्ष 2002 में देहरादून जॉली ग्रांट मेडिकल कॉलेज देहरादून से एमबीबीएस की परीक्षा पास की और अपने बैच की गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। शादी के बाद भी पढ़ाई नहीं छोड़ी और जॉली ग्रांट मेडिकल कॉलेज देहरादून से ही वर्ष 2004 में एमडी मेडिसिन की परीक्षा पास की। इसमें भी गोल्ड मेडलिस्ट रहीं।
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11 नवंबर 2002 को पिता राजेश कुमार कोड़ा ने शालिनी की शादी मशहूर चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. सीएल आर्य के बेटे विशाल आर्य से की थी। डॉ. सीएल आर्य से शालिनी को जितना प्यार और दुलार मिला, उनकी पत्नी वीना आर्य से उतनी ही प्रताड़ना मिली। रशिया से एमबीबीएस करने वाले पति डॉ. विशाल की डॉक्टरी कमजोर होने के कारण सीएल आर्य भी शालिनी को ही अपने साथ ज्यादा तवज्जो देते थे।