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अमर उजाला फाउंडेशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी में पत्रकारिता पर चर्चा
Sat, 06 Jun 2015 10:06 PM IST
Updated Sat, 06 Jun 2015 10:06 PM IST
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ‘जनपक्षीय पत्रकारिता की चुनौतियां एवं पहाड़ के गुमनाम नायकों की महागाथा’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इंडिया इंटरनेशल सेंटर में किया गया। (सभी फोटो: जी पॉल, अमर उजाला, दिल्ली)
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संगोष्ठी में जानेमाने पत्रकार मार्क टूली ने कहा कि सामाजिक पत्रकारिता और आर्थिक पत्रकारिता जैसे शब्दों से उन्हें आश्चर्य होता है। पत्रकारिता को जनपक्षीय कहना भी उन्हें आर्श्य में डालता है। पत्रकारिता दरअसल जन के लिए ही होती है। आर्थिक पत्रकारिता भी दरअसल आम आदमी पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों के बारे में की जाती है।
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मार्क टूली ने कहा कि भारत में पुनर्स्थापन के प्रयास कभी ईमानदारी से नहीं किए गए, भूमिअधिग्रहण के सबसे बड़े शिकार आदिवासी होंगे, लेकिन उनके बारे में बात ही नहीं की जा रही है। मार्क ने कहा कि अखबार में एडवर्टइजमेंट मैनेजर की भूमिका बढ़ गई है और पत्रकारिता इन्फोटेनमेंट में तब्दील हो चुकी है।
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केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक ने कहा कि उन्होंने कहा कि समाज और समुदाय के विकास में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया का मूल दायित्व सरकार और समाज पर पैनी नजर बनाए रखना और उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है।
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राजनीतिक चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि कागजों के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं, ऐसे में क्या ये मुहिम नहीं चलाई जा सकती कि अखबार 20 पेज से ज्यादा न हों। अखबारों में 50 फीसदी से ज्यादा विज्ञापन न हो। जनपक्षीय पत्रकारिता का मंत्र यही हो सकता है कि वे अंतिम व्यक्ति की बात को बोले, जो जहां है, वो वहीं से बोले, जो बोले सही बोले।
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