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तस्वीरें: इन महिलाओं को देख रास्ता बदल लेते हैं मर्द
Fri, 01 May 2015 04:55 PM IST
Updated Fri, 01 May 2015 04:55 PM IST
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"तीन बजे भोरवा में चलली सड़किया के सफाई में चला हे सखिये उठा रोड के सफाई में, हाथ में लेली टरचवा, हाथ में लेली डंडवा, चला हे सखिये उठा रोड के सफाई में...” बिहार के नालंदा इलाके में तड़के सुबह महिलाएं ये गीत गाती सड़कों पर निकलती हैं। महिलाओं की ये टोली पहरे पर निकली है, जिसका मकसद है खुले में शौच करने वालों को खदेड़कर आबादी वाले इलाकों से दूर करना।
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नालंदा जिले के अरौत गांव की 16 महिलाओं की ये पहरेदारी इलाके के लोगों को सफाई का पाठ पढ़ाने के लिए है। गांव में लगभग पौने तीन सौ घर हैं, लेकिन ज्यादातर घरों में शौचालय नहीं। ऐसे में औरत-मर्द दोनों शौच के लिए रास्तों के किनारे खुले में बैठा करते थे।
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गांव में रहने वाले सुदामा प्रसाद कहते हैं, “दस फुट की सड़क पर चलने की खातिर चार फुट भी जगह नहीं बचती थी। रात के अंधेरे में नीचे खेत में उतर कर आते-जाते थे कि मैला ना लगे”।
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गंदगी और उनसे होने वाली बीमारियों से परेशान गांव की ही एक महिला गिरजा देवी ने पिछले साल अक्तूबर में पहल करते हुए गांव की कुछ महिलाओं को इकट्ठा कर सुबह और शाम रास्ते पर पहरेदारी करने का निर्णय लिया।
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घरों में शौचालय नहीं और अंधेरे में दूर तक जाना सुरक्षित नहीं, ऐसे में पहरा देने वाली टोली की महिलाएं शौच करने वाली औरतों को दूर खेत तक छोड़कर आती हैं। यही नहीं समूह की महिलाएं हफ्ते में एक बार गाँव की नालियाँ भी साफ करती हैं।
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