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देखें, इस चर्च में भोजपुरी में होती है प्रार्थना, ईसा को करते हैं याद
Mon, 11 Jan 2016 04:40 PM IST
Updated Mon, 11 Jan 2016 04:40 PM IST
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दुआ अगर दिल से की जाए तो भक्त और भगवान के बीच भाषा कोई मायने नहीं रखती।लेकिन अपनी ही भाषा में की गई प्रार्थना से भक्त अपने भगवान से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। कम से कम बनारस के कई ईसाइयों का तो यही अनुभव है।आजकल बनारस का 136 साल पुराना 'लाल गिरजाघर' पूरी तरह पूरबिया रंग में रंगा नजर आता है और इसकी वजह है, भोजपुरी भाषा।
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यहां न केवल भोजपुरी भाषा में ईश वंदना होती है, बल्कि भोजपुरी गीत-संगीत के जरिए भी ईसा मसीह को याद किया जाता है। यह चर्च बनारस कैंट इलाके में मौजूद है। करीब 35 किलोमिटर दूर 'पिंडरा' गांव से हर रविवार को यहां अपने परिवार के साथ आने वाले अरविंद ने बताया कि वो हिंदी पढ़ और लिख लेते हैं, लेकिन अंग्रेजी में होने वाली प्रार्थना उनकी समझ में नहीं आती है।
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इसलिए 'लाल गिरजाघर' में भोजपुरी में प्रार्थना करके उनको काफी अच्छा लगता है, क्योंकि भोजपुरी उनकी मातृभाषा है।
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भोजपुरी कलिसिया के मुख्य सदस्यों में से एक अरविंद ने बताया कि उन्हें भोजपुरी भाषा में ईसा मसीह के बारे में फादर से मिलने वाली जानकारी भी बहुत अच्छी लगती है। वहीं गांव के माहौल में रहने वाली प्रियंका को तो यहां तक यकीन है कि भोजपुरी में ईसु उनकी प्रार्थना सुनते हैं।
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'लाल गिरजाघर' के भोजपुरी कलिसिया की प्रमुख नम्रता बताती हैं कि वो भोजपुरी में प्रार्थना करवाती हैं। यहां गीत-संगीत भी होता है और गांव और समाज की पिछड़ी महिलाओं को भोजपुरी भाषा में ही स्वावलम्बी बनाने की कोशिश की जाती है। उनके मुताबिक, "भोजपुरी बहुत ही प्यारी भाषा है और इसमें अपनापन झलकता है। भोजपुरी कलिसिया में इस वक्त कुल 500 सदस्य हैं और ये बनारस में पांच अलग-अलग जगहों पर भी चलता है"।
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